By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 25, 2026
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जारी दो अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया गया था। इन अधिसूचनाओं के तहत विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के लिए अलग पुलिस थाने बनाए गए थे और इन इकाइयों द्वारा की गई जांच से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बिधाननगर और सिलीगुड़ी में विशेष अदालतें गठित की गई थीं। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उच्च न्यायालय के 19 जून के आदेश को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की अपील पर नोटिस जारी किया।
उच्च न्यायालय ने यह आदेश जलपाईगुड़ी बार एसोसिएशन के सदस्यों की याचिका पर दिया था। याचिका में 30 जनवरी 2025 और 10 फरवरी 2025 को जारी दोनों अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई थी। पहली अधिसूचना में पुलिस थानों के गठन से संबंधित प्रावधान थे।
इसके तहत सिलीगुड़ी एसटीएफ मुख्यालय पुलिस थाना और साल्ट लेक एसटीएफ मुख्यालय पुलिस थाना बनाए गए थे। दूसरी अधिसूचना में इनसे जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों के क्षेत्राधिकार का निर्धारण किया गया था। 10 फरवरी 2025 की अधिसूचना के तहत इन दोनों एसटीएफ पुलिस थानों को आपराधिक अदालतों के अधीन लाया गया था।
एसटीएफ का गठन पांच साल से अधिक समय पहले राज्यभर में आतंकवाद, संगठित गिरोहों, अवैध हथियारों, गोला-बारूद और मादक पदार्थों जैसे आधुनिक शहरी संगठित अपराधों से निपटने के लिए किया गया था।