By अभिनय आकाश | Sep 28, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अधिकारियों को बकाया ट्रैफिक चालान वसूलने के लिए ज़मीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ ई-चालान जारी करना काफ़ी नहीं है और उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान, जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि अगर लोग ट्रैफिक चालान का भुगतान नहीं करते हैं, तो अधिकारी बिजली बिल सहित अन्य सरकारी बकाया राशि से जोड़कर चालान की रकम वसूलने के तरीकों पर विचार कर सकते हैं। 'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर लोग ट्रैफिक चालान का पेमेंट नहीं कर रहे हैं, तो इसे उनके बिजली के बिल में जोड़ दें। उन्हें बिजली का बिल तो भरना ही होगा, वरना बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसका कोई तरीका निकालें। इस देश में आपको कोई न कोई रास्ता तो निकालना ही होगा। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अधिकारियों को ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस भले ही हज़ारों या लाखों ई-चालान जारी कर दे, लेकिन असली मुद्दा उनसे लगाए गए जुर्माने की वसूली का है।
अन्य जिन कदमों पर चर्चा हुई, उनमें पहले से जारी ड्राइविंग लाइसेंस को सस्पेंड करना और जिन गाड़ियों के चालान का भुगतान नहीं हुआ है, उनके लिए PUC सर्टिफिकेट जारी करने से इनकार करना शामिल था। कोर्ट ने यह भी कहा कि गाड़ियों की रैंडम चेकिंग होनी चाहिए और अगर किसी गाड़ी का ई-चालान बकाया है, तो अधिकारी ज़रूरत पड़ने पर उसे ज़ब्त करने की कार्रवाई कर सकते हैं। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि देश में सिस्टम को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए अधिकारियों को ऐसे समाधान खोजने होंगे जो ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखें। साथ ही, कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि बिजली बिल में बकाया ट्रैफिक चालान जोड़ने का विचार सुनवाई के दौरान सिर्फ़ एक सुझाव था, न कि इसे लागू करने का कोई आदेश।