By अभिनय आकाश | Oct 14, 2026
सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को एक याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह दिल्ली की वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (विशेष गहन समीक्षा) के दौरान जिन वोटरों को नोटिस भेजे गए थे, उनकी लिस्ट और हर नोटिस का खास कारण सार्वजनिक करे। याचिकाकर्ताओं ने एक ऐसी व्यवस्था बनाने की भी मांग की है जिससे उन वोटरों के नाम फिर से जोड़े जा सकें जिन्हें समीक्षा के दौरान हटा दिया गया था, और इसके लिए उन्हें यह घोषणा न करनी पड़े कि वे पहली बार नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने बुधवार को चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने यह मामला उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। याचिका में उन मानदंडों, परिभाषाओं और पैमानों का खुलासा करने की भी मांग की गई थी, जिनका इस्तेमाल कंप्यूटर सिस्टम और ऑपरेशनल गाइडलाइंस में वोटरों को लॉजिकल विसंगतियों की श्रेणी में वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है। याचिकाकर्ताओं ने हाल ही में लंबित मामले में एक आवेदन दायर किया, जिसमें यह निर्देश देने की मांग की गई कि पहले से पंजीकृत वोटरों को फॉर्म 6 में घोषणा-पत्र जमा करने की आवश्यकता न हो, क्योंकि उनके अनुसार यह ऐसे वोटर पर तथ्यात्मक रूप से लागू नहीं होता है। उन्होंने पहले से पंजीकृत वोटरों को मतदाता सूची में बहाल करने के लिए एक उपयुक्त फॉर्म या घोषणा-पत्र की भी मांग की। फॉर्म 6 का इस्तेमाल पात्र व्यक्ति द्वारा मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन करने हेतु किया जाता है।