By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 27, 2026
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान राज्य की मतदाता सूची से 27 लाख नाम हटाए जाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया तथा कहा कि इन नामों को हटाए जाने के लिए न तो भाजपा और न ही निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि ये नाम खुद बनर्जी द्वारा दायर एक मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत न्यायिक अधिकारियों ने हटाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद बनर्जी अब इसका ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
अधिकारी ने एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक बहस को चुनावी जवाबदेही के व्यापक मुद्दे से जोड़ने की भी कोशिश की और बनर्जी पर मतदाताओं के फैसले को स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर केरलम में एसआईआर अच्छा है, तो पश्चिम बंगाल में यह खराब क्यों है? हमने 208 सीट जीती हैं, जबकि दोनों पक्षों (तृणमूल कांग्रेस और उसके सहयोगियों) के पास 80 सीट हैं।
ममता बनर्जी जनता के फैसले को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं।’’ मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी बनर्जी द्वारा श्रीरामपुर में एक रैली को संबोधित करने और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग तथा भाजपा पर नए सिरे से हमला किए जाने के एक दिन बाद आई। अधिकारी ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और दो निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच हुई बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बैठक और उसके बाद निर्वाचन आयोग की ओर से जारी बयान से स्पष्ट होता है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े फैसले केवल सीईसी ने अकेले नहीं लिए थे।
उनका यह दावा तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर जारी विवाद की पृष्ठभूमि में आया है। अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर में बताया गया था कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर कई मौकों पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान मतभेद सामने आना सामान्य है और उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।