By नीरज कुमार दुबे | Jun 24, 2026
पश्चिम बंगाल की सीमा पर इन दिनों एक ऐसा अभियान चल रहा है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बंगाल सरकार और सीमा सुरक्षा बल ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने विधानसभा में साफ शब्दों में कहा है कि अब बंगाल की धरती पर अवैध तरीके से रहने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि अब तक लगभग दस हजार अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा जा चुका है, जबकि अठारह सौ लोग राज्य के बारह होल्डिंग सेंटरों में रखे गए हैं और उन्हें भी जल्द सीमा पार भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अवैध घुसपैठियों को जेल में रखकर मुफ्त भोजन और दवाइयां देने की बजाय उन्हें सीधे बांग्लादेश वापस भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता का पैसा देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों पर नहीं खर्च होगा, बल्कि अन्नपूर्णा योजना जैसी जनकल्याण योजनाओं में लगाया जाएगा। शुभेन्दु अधिकारी ने यह भी बताया कि उनकी पिछली चेतावनी के बाद कई बांग्लादेशी खुद ही हाकिमपुर सीमा से वापस लौट गए।
सरकार के अनुसार, भारत बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए अब तक 142.69 एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा बल को सौंपी जा चुकी है। शुभेन्दु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति के कारण वर्षों तक सीमा सुरक्षा के काम में बाधा डाली गई।
इसके अलावा, उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर गांव की तस्वीर इस समय पूरे अभियान का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सुबह के अंधेरे में बसों से उतरते लोग और गोद में बच्चों को लिए महिलाएं इस बात का संकेत दे रहे हैं कि अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई ने सीमावर्ती इलाकों में हलचल मचा दी है। मोबाइल संदेशों और सोशल मीडिया के जरिए यह खबर तेजी से फैली कि सरकार अब अवैध बांग्लादेशियों को चिन्हित कर वापस भेज रही है। इसके बाद अनेक लोग खुद ही सीमा क्षेत्रों की ओर पहुंचने लगे।
बताया जा रहा है कि हाकिमपुर में पहुंचे कई लोगों ने स्वीकार किया कि वे बांग्लादेश से काम की तलाश में भारत आए थे। किसी ने गोदाम में मजदूरी की, किसी ने सफाई का काम किया, तो किसी ने रेलवे स्टेशन के आसपास छोटे रोजगार से परिवार चलाया। लेकिन अब जब सरकार ने सख्ती शुरू की है तो उनमें डर फैल गया है। कई लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं, जबकि कुछ के पास आधार और अन्य पहचान पत्र भी पाए गए। यही स्थिति प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन रही है।
उधर, सीमा पर चल रही इस कार्रवाई को लेकर बांग्लादेश की ओर भी तनाव बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार बांग्लादेश सीमा रक्षक बल वहां के ग्रामीणों से घोषणा करवा रहा है कि भारत से आने वालों को गांवों में घुसने न दिया जाए। कई जगहों पर लोग डंडे और लोहे की छड़ें लेकर सीमा पर निगरानी कर रहे हैं। नतीजा यह है कि कुछ लोग दोनों देशों के बीच की जमीन यानि नो मैन्स लैंड पर फंसकर रह जा रहे हैं। उनके सामने न भारत में रहने का रास्ता बच रहा है और न बांग्लादेश उन्हें स्वीकार कर रहा है।
सीमा सुरक्षा बल के जवानों के अनुसार हाकिमपुर के अलावा तराली, आसी शिकारी और अमुदिहा जैसे इलाकों से भी लोगों को सीमा तक पहुंचाया जा रहा है। कई जगहों पर अभी बाड़ नहीं लगी है, इसलिए घुसपैठ रोकना कठिन हो जाता है। इसी वजह से सरकार अब तेजी से फेंसिंग का काम पूरा करना चाहती है।
हालांकि इस पूरी कार्रवाई के बीच सीमावर्ती गांवों में एक अलग चिंता भी उभर रही है। किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि नई सीमा बाड़ के कारण उनकी खेती और आवाजाही प्रभावित हो सकती है। कुछ गांवों में फाटक लगाए गए हैं और लोगों को बताया गया है कि खेतों तक जाने के लिए तय समय का पालन करना होगा। वहीं, राज्य सरकार अपने फैसले पर अडिग दिखाई दे रही है। शुभेन्दु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि बंगाल अब घुसपैठियों का सुरक्षित ठिकाना नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता। सरकार की नीति स्पष्ट है कि जो भारत का नागरिक है, उसे किसी बात का भय नहीं होना चाहिए, लेकिन जो अवैध तरीके से देश में घुसा है, उसे हर हाल में वापस जाना होगा।
बहरहाल, यह पूरा घटनाक्रम केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और अवैध घुसपैठ जैसे गंभीर सवालों को देश के सामने फिर से खड़ा कर रहा है। सरकार के इस अभियान ने साफ संकेत दे दिया है कि अब सीमा पार कर भारत में अवैध तरीके से घुसने वालों के लिए समय बदल चुका है। चेतावनी बिल्कुल स्पष्ट है कि भारत की सीमाएं कमजोर नहीं रहीं और घुसपैठ की हर कोशिश का जवाब सख्त कार्रवाई से दिया जाएगा।