कोरोना वायरस के सामुदायिक प्रसार का पता लगाएगी स्वदेशी किट

By योगेश कुमार गोयल | Jun 26, 2020

भारत सहित पूरी दुनिया कोरोना के कहर से त्रस्त है और पूरी दुनिया में कोरोना के लिए वैक्सीन बनाने के प्रयासों के अलावा कोरोना की जांच के लिए भी सस्ती और कारगर तकनीकों की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं। भारतीय वैज्ञानिक भी कोरोना वैक्सीन बनाने के अलावा नई-नई स्वदेशी तकनीकों का इस्तेमाल कर इस मिशन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। कोविड-19 से निजात पाने के सफल प्रयासों की इसी कड़ी में भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ मिलकर आईसीएमआर ने देश में ही कोरोना वैक्सीन तैयार करने के लिए काम शुरू कर दिया है, वहीं कोरोना जांच को लेकर भी भारत द्वारा सफलताएं हासिल की जा रही हैं।

सेरो सर्वे का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक संक्रमण का पता लगाना होता है, जिसमें किसी विशेष इलाके में एक साथ कई लोगों के ब्लड सीरम टेस्ट किए जाते हैं, जिससे पता चल जाता है कि संक्रमण किस स्तर पर फैल रहा है। यदि आबादी में कोरोना संक्रमण है तो इस जांच से पता चल जाएगा और संक्रमित व्यक्ति में एंटीबॉडी विकसित होती है, इसकी जानकारी भी मिल जाएगी। कोविड-19 के एंटीबॉडी का पता लगाने वाली इस स्वदेशी जांच किट को ‘कोविड कवच एलिसा’ नाम दिया गया है। एलिसा का अर्थ है ‘एंजाइम-लिंक्ड इम्युनोसॉरबेंट एसे’। यह आमतौर पर जैव नमूनों में एंटीबॉडी, एंटीजन अथवा प्रोटीन और ग्लाइकोप्रोटीन जैसे अन्य यौगिकों को मापने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया है। यह एंटीबॉडी टेस्ट किट बनाने के लिए ही पहले एनआईवी के वैज्ञानिकों को मरीजों में कोविड-19 का कारण बनने वाले सार्स-कोव-2 वायरस को अलग करना पड़ा था। उसके बाद ही वैज्ञानिकों द्वारा कोविड-19 के लिए एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए एलिसा परीक्षण विकसित किया गया।

आईसीएमआर तथा एनआईवी के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 से जुड़े एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए आईजीजी एलिसा टेस्ट को विकसित करने और मान्यता देने के लिए कड़ी मेहनत की। किट की सेंसिटिविटी और गुणवत्ता परखने के लिए मुम्बई में दो जगहों पर यह टेस्ट किए गए, जो काफी सफल रहे। विशेषज्ञों के अनुसार इस जांच किट में ऐसी उच्च संवेदनशीलता तथा सटीकता है, जिसके जरिये ढाई घंटों में एक साथ 90 सैंपल टेस्ट किए जा सकते हैं तथा इस किट से जिला स्तर पर भी एलिसा आधारित परीक्षण आसानी से संभव है। कुछ समय पहले सही परिणाम नहीं देने के कारण आईसीएमआर द्वारा चीन से करीब पांच लाख कोविड-19 रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट का ऑर्डर रद्द कर दिया गया था, इसलिए सटीक परिणाम देने वाली स्वदेशी रैपिड टेस्टिंग किट की जरूरत महसूस की जा रही थी। ‘कोविड कवच एलिसा’ रैपिड टेस्टिंग किट के ही समान है, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों की जांच की जा सकती है। मानव शरीर में कोरोना वायरस के एंटीबॉडी की मौजूदगी का पता लगाने वाली इस स्वदेशी जांच किट की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि सटीक परिणाम देने के साथ ही इससे कम समय में जांच संभव होगी और यह बड़ी आबादी वाले इलाकों में कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर निगरानी में अहम भूमिका निभाएगी।

इसे भी पढ़ें: कांग्रेस के मन में भरे हुए मोदी विरोध को स्पष्ट दर्शाते हैं राहुल गांधी के ट्वीट

कोरोना संक्रमण की जांच के लिए आरटी-पीसीआर कराना जरूरी होता है लेकिन विकसित की गई तकनीक एंटीबॉडी टेस्ट है। शरीर में कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाता है, जिसमें लोगों का स्वैब सैंपल लिया जाता है। एंटीबॉडी टेस्ट में उंगली से एक-दो बूंद रक्त लेकर उस नमूने की जांच की जाती है, जिससे पता लगाया जाता है कि शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र ने कोरोना वायरस को बेअसर करने के लिए एंटीबॉडीज बनाए हैं या नहीं। कोई व्यक्ति किसी वायरस का शिकार होता है तो उसके शरीर में वायरस से लड़ने वाले एंटीबॉडीज बन जाते हैं। इन्हीं एंटीबॉडीज का पता लगाने के लिए रैपिड टेस्ट की जरूरत पड़ती है, जिसके परिणाम काफी कम समय में आ जाते हैं जबकि कोरोना जांच के लिए आरटी-पीसीआर की रिपोर्ट में करीब 24 घंटे लगते हैं। आरटी-पीसीआर टेस्ट को सर्वोत्तम टेस्ट माना जाता है लेकिन किसी आबादी में कितने लोगों का सामना वायरस से हुआ है, यह समझने के लिए एंटीबॉडी टेस्ट महत्वपूर्ण है। इसमें आरटी-पीसीआर किट की तुलना में वॉयो-सेफ्टी और वॉयो-सिक्योरिटी की जरूरत भी न्यूनतम ही होती है और यह अन्य रैपिड टेस्ट किट की तुलना में भी अधिक प्रभावी है।

-योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ पुस्तक के लेखक हैं)

प्रमुख खबरें

WhatsApp के बाद अब Instagram पर शिकंजा, आपत्तिजनक Ads पर केंद्र सरकार ने Meta को भेजा Notice

Team India के श्रीलंका दौरे का Schedule जारी, Galle और Colombo में होगी स्पिन की कड़ी परीक्षा

Vaibhav Suryavanshi को प्लेइंग-11 में कब मिलेगा मौका? England के दिग्गजों ने उठाए गंभीर सवाल।

Wimbledon 2026: Jannik Sinner ने चोट की अफवाहों को किया खारिज, दमदार जीत से पहुंचे तीसरे दौर में