सहानुभूति की लहर पर होकर सवार, चिराग लगा सकते हैं LJP की चुनावी नैया पार

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 10, 2020

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन राजनीतिक शून्यता तो पैदा कर ही गया है साथ ही बिहार विधानसभा चुनावों के ऐन मौके पर सभी दलों और गठबंधनों के समीकरण भी गड़बड़ा गये हैं। भारत में जहाँ, चुनावों में सहानुभूति लहर का अकसर लाभ मिलता है, देखना होगा कि लोक जनशक्ति पार्टी की चुनावी संभावनाएँ कितनी बेहतर होती हैं। चिराग पिछले कुछ समय से बिहार की जनता से जिस तरह भावनात्मक लगाव जता रहे थे अब उसको वह और आगे बढ़ा सकते हैं। विरोधी दलों के लिए मुश्किल वाली बात यह होगी कि अब वह ना तो पासवान और ना ही चिराग पर निशाना साध सकते हैं क्योंकि जितना निशाना लोजपा पर साधा जायेगा उसको उतना ही लाभ होगा।

इसे भी पढ़ें: बड़े दलित और समाजवादी नेता होने के साथ कुशल प्रशासक थे पासवान: मनमोहन सिंह

देखना यह भी होगा कि क्या चिराग को उनके परिवार के लोग भी अपना नेता स्वीकार करते हैं? यह बात इसलिए उठी है क्योंकि बिहार में सुरक्षित लोकसभा सीटों पर एक तरह से पासवान परिवार का ही कब्जा है। रामविलास पासवान के मंझले भाई क्या अपने भतीजे को नेता स्वीकार करेंगे सबकी नजरें इसी ओर लगी हुई हैं क्योंकि बताया जाता है कि वह उस बैठक में शामिल नहीं हुए थे जिसमें चिराग ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। यह भी देखना होगा कि क्या पासवान के जाने के बाद दुसाध वोट चिराग के साथ बने रहते हैं। उल्लेखनीय है कि रामविलास पासवान दशकों तक दुसाधों के सबसे बड़े नेता रहे। चुनाव में दुसाधों की सक्रिय भागीदारी के चलते ही पासवान की राजनीतिक ताकत कभी कमजोर नहीं हुई।

प्रमुख खबरें

World Cup के बीच Barcelona में बड़ी हलचल, Lamine Yamal के बयान से Transfer Market में मची खलबली

अमेरिकी बेस पर Iran का बड़ा Missile Attack, Jordan ने हवा में ही किया नाकाम, तनाव चरम पर

Sanju Samson को बाहर करने पर R Ashwin का BCCI पर बड़ा हमला, बोले- यह सरासर नाइंसाफी है

Argentina की जीत पर Egypt का हंगामा, रेफरी विवाद पर FIFA का कड़ा जवाब- हमारे फैसलों पर सवाल न उठाएं।