Tahir Hussain ने Ankit Sharma हत्याकांड में उम्रकैद की सजा को Delhi High Court में चुनौती दी

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 26, 2026

आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने फरवरी 2020 के दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। हुसैन ने आरोप लगाया कि जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए जांच एजेंसियों ने उन्हें इस मामले में फंसाने के इरादे से जांच की। सोमवार को दायर की गई इस अपील पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

साथ ही, असली अपराधियों को कानून के कठघरे में नहीं लाया गया है। हुसैन ने निचली अदालत के 13 जुलाई के दोषसिद्धि के आदेश और 31 जुलाई के सजा संबंधी आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया है। उसकी दलील है कि निचली अदालत ने पूरी तरह अविश्वसनीय गवाहों के बयानों पर भरोसा किया और ऐसे गवाहों के बयानों को भी आधार बनाया, जिन्होंने घटना को देखा ही नहीं था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 फरवरी 2020 को शिकायतकर्ता रविंदर कुमार ने दयालपुर पुलिस थाने के अधिकारियों को सूचना दी थी कि उनका बेटा अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 से लापता है। बाद में उन्हें कुछ स्थानीय लोगों से पता चला कि चांद बाग पुलिया स्थित मस्जिद से हत्या के बाद एक व्यक्ति के शव को खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि शर्मा का शव खजूरी खास नाले से बरामद किया गया था और उसके शरीर पर चोट के 51 निशान थे।

राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने शर्मा की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन और चार अन्य को 31 जुलाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि यह मामला ‘‘दुर्लभ से दुर्लभतम’’ श्रेणी में नहीं आता, जिसके लिए मौत की सजा दी जाए। अदालत ने हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हुसैन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 302 (हत्या), 365 (किसी व्यक्ति को बंधक बनाने के इरादे से अपहरण करना), 147 (दंगा करना), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना), 153-ए (शत्रुता को बढ़ावा देना) और 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत घोषित आदेश की अवज्ञा)के साथ धारा 149 (गैरकानूनी रूप से जमा होना) के तहत दोषी ठहराया गया था। अधीनस्थ अदालत ने 13 जुलाई को हुसैन और चार अन्य को शर्मा की हत्या के लिए दोषी ठहराया था, जिन पर दंगों के दौरान भीड़ ने हमला किया था। बाद में शर्मा का शव एक नाले में मिला।

चौबीस फरवरी 2020 को नागरिकता कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बेकाबू होने के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें शुरू हो गई थीं। इन झड़पों में 53 लोगों की मौत हो गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

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