By अभिनय आकाश | Sep 02, 2024
पाकिस्तान की राजनीति दहशतगर्दी की बैसाखी के सहारे टिकी हुई है। पाकिस्तान एकलौता ऐसा देश है जहां आतंकवाद की दो कैटेगरी है। अच्छा आतंकवाद और बुरा आतंकवाद। अच्छा वो जिन्हें पाकिस्तान सेना का समर्थन हासिल है और बुरा वो जो पाकिस्तानी सेना के खिलाफ काम करता है। इसमें सबसे बड़ा नाम तहरीक-ए-तालिबान यानी टीटीपी है। आतंकपरस्त पाकिस्तान में आतंकियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि सेना भी उनके आगे घुटने टेकने के लिए मजबूर है। हाल ही में अलगाववादियों ने बलूचिस्तान में कई बसों को रोककर आईडी कार्ड दिखाकर दर्जनों पंजाबी मजदूर की हत्या कर दी थी। इस वारदात के बाद पाकिस्तान के सीमांत प्रांत खैबर पख्तूनवा में सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल और उसके दो भाईयों को टीटीपी के आतंकियों ने किडनैप कर लिया था।
लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि मुनीर की सेना के जिस फौजी को टीटीपी ने रिहा किया है। वो लेफ्टिनेंट कर्नल तहरीक-ए-तालिबान की तारीफों के पुल बांध रहा है। 140 सेकेंड की क्लिप देखकर रावलपिंडी में बैठे जनरल मुनीर शायद अपना इस्तीफा टाइप कर रहे होंगे। टीटीपी की तारीफों के कसीदे पढ़ रहा ये लेफ्टिनेंट कर्नल 72 घंटे पहले तक मुनीर का फेवरेट कमांडर हुआ करता था। लेकिन तहरीक-ए-तालिबान की कैद में इसका ह्रदय परिवर्तन हो गया। मुनीर का लेफ्टिनेंट कर्नल जिस टीटीपी की तारीफें कर रहा है वो वही आतंकी संगठन है जो पाक सेना के जवानों को चुनचुनकर मारता है। खुलकर शहबाज शरीफ का विरोध करता है। लेकिन वही जवान पर टीटीपी को इस्लाम का रहनुमा बता रहा है।