Tarak Mehta Birth Anniversary: गुजराती थिएटर के जाने-माने नाम थे तारक मेहता, अपनी लेखनी से दुनिया को पहनाया 'उल्टा चश्मा'

By अनन्या मिश्रा | Dec 26, 2025

टीवी की दुनिया के पॉपुलर शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' ने हर वर्ग के दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। हालांकि बहुत कम लोगों को पता है कि इस शो की शुरूआत कैसे हुई। बता दें कि इसका पूरा क्रेडिट गुजराती साहित्य के फेमस हास्यकार, नाटककार और कॉलमनिस्ट तारक जनुभाई मेहता को जाता है। आज ही के दिन यानी की 26 दिसंबर को तारक जनुभाई मेहता का जन्म हुआ था। तारक मेहता एक ऐसे साहित्यकार थे, जो दुनिया को सीधे नहीं बल्कि उल्टे चश्मे से देखते थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर तारक मेहता के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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मशहूर साप्ताहिक कॉलम

तारक मेहता मुख्य रूप से फेमस साप्ताहिक कॉलम 'दुनिया ने उंधा चश्मा' के लिए जाने जाते हैं। मार्च 1971 में गुजराती साप्ताहिक पत्रिका 'चित्रलेखा' में पहली बार प्रकाशित हुई थी। इस कॉलम में तारक मेहता समकालीन सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को हास्य के उल्टे चश्मे से देखते थे। इससे पाठकों को हंसी-गुदगुदी के साथ गहरा संदेश मिलता था।

80 से ज्यादा किताबें

तारक मेहता ने अपने करियर में 80 से ज्यादा किताबें लिखीं थी। इनमें से उनके कई कॉलम पर आधारित थीं, वहीं तीन किताबें कई अखबारों में छपे उनके लेखों का संकलन थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी शैली के बारे बताया था कि समाज की कमियों को उन्होंने दुनिया में उंधा चश्मा कॉलम के जरिए हल्के-फुल्के व्यंग्य से उजागर किया था। वह बताते थे कि वह मुद्दों को उल्टे चश्मे से देखते हैं, जिससे कि लोग हंसते हुए सोचें।

पुरस्कार

तारक मेहता गुजराती थिएटर के प्रमुख व्यक्तित्व थे। उन्होंने कई हास्य नाटकों का अनुवाद किया था। तारक मेहता की लेखने में हल्का-फुल्का व्यंग्य था। वह समाज की कमियों पर चुटकी लेते थे। लेकिन हास्य कभी कटु नहीं होता। साल 2015 में भारत सरकार ने तारक मेहता को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया।

तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियर

बता दें कि साल 2008 में निर्माता असित कुमार मोदी ने तारक मेहता के इसी कॉलम पर आधारित शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' शुरू किया था। यह सीरियल सोनी सब चैनल पर प्रसारित होता है। इस सीरियल में गोकुलधाम सोसाइटी के किरदारों के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी की हंसी-मजाक दिखाया जाता है। तारक मेहता ने अपनी लेखनी से न सिर्फ गुजराती साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि टीवी के माध्यम से पूरे देश में हंसी का संदेश फैलाया।

मृत्यु

वहीं 01 मार्च 2017 को लंबी बीमारी के बाद 87 साल की उम्र में तारक मेहता का अहमदाबाद में निधन हो गया था।

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