By प्रेस विज्ञप्ति | Jan 02, 2026
त्रिपुरा का माछीमार गाँव अब कभी एंजेल चकमा को वापस आते नहीं देखेंगे। एक ओर बांग्लादेश देश सीमा दूसरी ओर अच्छी शिक्षा के कमी, इसी कारण त्रिपुरा और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से बच्चे देहरादून जेसीसेकनगर में सपने साकार करने की अभिलाषा लिए आते हैं। पर जब उनकी मृत देह गांव पहुंचती है तो शब्द चुक जाते हैं पीड़ा, विषाद, आक्रोश और हताशा को व्यक्त करने में, यहाँ पूर्व सांसद तरुण विजय देहरादून से पहुँचे तो एंजेल के घर में सन्नाटा था। पिता, भाई , दादा निकटस्थ बौद्ध मंदिर में सात दिवसीय पूजा में थे। माँ, जिसको एंजल ने भरोसा दिया था कि उसको एक लाख रुपए मासिक पर प्लेसमेंट मिल गया है वह माँ को देहरादून लायेगा, आज अपने बेटे के अंतिम शांति की पूजा का काम करने गई थी।
तरुण विजय इस माहौल में पिता से मिले तो दोनों रो पड़े। उन्होंने माना कि उत्तराखंड और त्रिपुरा सरकारें दोनों आपस में संपर्क में हैं, श्री पुष्कर धामी पूरे जोर से अपराधियों पर शिकंजा कस रहे हैं, चकमा परिवार को आर्थिक सहायता भी दी है - पिता हाथ जोड़कर सिर्फ़ यही कहते हैं कि हमें केवल न्याय चाहिए। तरुण प्रसाद चकमा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से प्रार्थना की है कि पुलिस जाँच का दायरा बढ़ाया जाए। सेलाकुई पुलिस ने मेरे बेटे से एफ़आईआर नहीं ली, जोर देने पर ली - दो दिन बाद प्रति दी और डाँटा कि तुम लोग पॉलिटिक्स कर रहे हो, जिस सौरभ बरुआ नामक सेलाकुई के मकान मालिक ने एक दिन पहले एंजल से झगड़ा करके उनको घर से निकाला उसकी भूमिका की जांच क्यों नहीं की जा रही ?
तरुण विजय ने उनको आश्वस्त किया और इस विषय पर उत्तरस्खंड तथा उत्तर पूर्वांचल एक ही हैं, हम इन मुद्दों को सरकार के समक्ष रखेंगे यह भरोसा दिया। एंजल चकमा के लिया ने भरी आँखों से श्री तरुण विजय द्वारा उनके गांव आकर सांत्वना देने हेतु आभार व्यक्त किया। तरुण विजय ने कहा कि यह एक मानवीय जघन्य अपराध की घटना है इसको गिद्ध राजनीति का शिकार नहीं बनने देना चाहिए. जो लोग इस घटना को उत्तराखंड और हिंदुत्व बनाम उत्तरपूर्वांचल का रूप देने का षड्यंत्र कर रहे हैं वे सफल नहीं होंगे।