By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 03, 2026
कोलकाता, दो अगस्त निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने रविवार को दिल्ली में परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन और 2024 के उस आंदोलन के बीच समानता बताई, जिसने शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। उन्होंने कहा कि ढाका के छात्र आंदोलन ने “हमें बेवकूफ बनाया”। यहां पत्रकारों से बात करते हुए, मशहूर लेखिका ने कहा कि उन्हें जंतर-मंतर पर हो रही घटनाओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन विरोध-प्रदर्शन की एक छोटी सी वीडियो क्लिप ने उन्हें “बांग्लादेश में जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन” की याद दिला दी।
क्योंकि हमें लगा कि छात्र आरक्षण प्रणाली को खत्म करना चाहते हैं। शेख हसीना उनकी मांगों को मानने के लिए तैयार भी हो गई थीं, लेकिन आखिरकार सरकार गिर गई। बाद में हमें पता चला कि उस आंदोलन के पीछे जिहादी (इस्लामिक कट्टरपंथी) थे।
इसका नतीजा बांग्लादेश के लिए अच्छा नहीं रहा है। वहां जिहादियों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है।” उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश में जो घटनाक्रम हुआ, उसने ऐसे आंदोलनों के नतीजों को लेकर उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है। लेखिका का कहना है कि 2024 के बांग्लादेश विरोध-प्रदर्शन से सबक लिया जाना चाहिए।
पांच अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए एक बड़े विरोध-प्रदर्शन ने हसीना की अवामी लीग सरकार को सत्ता से हटा दिया। इसके तीन दिन बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने कामकाज संभाला और तब से हसीना नयी दिल्ली में निर्वासित जीवन बिता रही हैं। देश राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से गुजरा, जबकि हिंदुओं समेत अल्पसंख्यक समुदायों ने अपनी सुरक्षा को लेकर बार-बार चिंता जताई है।
इस साल फरवरी में, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने एक ऐतिहासिक संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की, जिसके बाद वह प्रधानमंत्री बने।