RBI नियमों के तहत Tata Sons की लिस्टिंग से सामने आएगा 20 लाख करोड़ रुपये का संभावित वैल्यूएशन

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 18, 2026

टाटा संस के निदेशक मंडल का भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सूचीबद्धता संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करने का फैसला भारतीय शेयर बाजार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार प्रतिभागियों का कहना है कि इस सूचीबद्धता से टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी में मौजूद संपत्तियों और हिस्सेदारियों का मूल्य अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकता है। निदेशक मंडल ने बृहस्पतिवार को सूचीबद्धता की दिशा में आगे बढ़ने की मंशा के साथ एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के एक और कार्यकाल के लिए नियुक्त किया।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, टाटा संस की सूचीबद्धता से इन हिस्सेदारियों का मूल्यांकन और कंपनी की वित्तीय स्थिति अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकती है। सलाहकार फर्म इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज ने एक रिपोर्ट में कहा कि टाटा संस के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से समूह की कंपनियों के करीब 1.77 करोड़ गैर-विशिष्ट शेयरधारकों को लाभ हो सकता है। इन्हें समूह कंपनियों की हिस्सेदारी के जरिये टाटा संस में अप्रत्यक्ष निवेश मिलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित आईपीओ भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। विभिन्न रिपोर्ट में इसका आकार कम-से-कम पांच अरब डॉलर रहने जबकि कंपनी का मूल्यांकन 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, अंतिम रूप इस पर निर्भर करेगा कि टाटा संस कितनी हिस्सेदारी बेचने की पेशकश करती है।

टाटा समूह की कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में तेजी भी देखी गई है। इसे टाटा संस की संभावित सूचीबद्धता से जुड़ी उम्मीदों और उसकी हिस्सेदारियों के मूल्य के सामने आने की संभावना से जोड़कर देखा गया। टाटा संस के ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के कारण सूचीबद्धता की अनिवार्यता पैदा हुई है।

आरबीआई ने हाल में यह दर्जा हटाने का कंपनी का अनुरोध स्वीकार नहीं किया, जिससे सूचीबद्धता अनिवार्य हो गई है। चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब टाटा संस के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता थी। उन्होंने अगस्त में संकेत दिया था कि फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह नया कार्यकाल नहीं मांगेंगे।

हालांकि बोर्ड ने पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए उनके नाम का समर्थन कर दिया। सूचीबद्धता को लेकर टाटा ट्रस्ट और शापूरजी पालोनजी समूह की राय अलग है। टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने सार्वजनिक सूचीबद्धता के बजाय दूसरे विकल्प तलाशने की बात कही है। दूसरी ओर, करीब 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह सूचीबद्धता के पक्ष में है। टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बोर्ड के फैसले की वैधता को भी चुनौती दी है।

इससे सूचीबद्धता के मुद्दे के साथ टाटा संस के संचालन और कॉरपोरेट संचालन से जुड़ा अलग विवाद भी जुड़ गया है। तमिलनाडु इन्वेस्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विग्नेश नागप्पन ने कहा कि चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति टाटा संस की संभावित सूचीबद्धता के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि टाटा संस के सूचीबद्ध होने से निवेशकों को देश के बड़े कारोबारी समूहों में से एक में सीधे हिस्सेदारी लेने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, उन्होंने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स जैसी कई बड़ी कंपनियों की संभावित सूचीबद्धता बाजार में उपलब्ध पूंजी पर असर डाल सकती है। टाटा संस की सूचीबद्धता से निवेशकों को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, इंडियन होटल्स और एयर इंडिया जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी रखने वाली होल्डिंग कंपनी में सीधे निवेश का अवसर मिलेगा। हालांकि, सूचीबद्धता से टाटा संस की हिस्सेदारियों की जानकारी और बाजार-आधारित मूल्यांकन अधिक स्पष्ट हो सकता है, लेकिन इसका समय, ढांचा, मूल्यांकन और मौजूदा संचालन व्यवस्था पर प्रभाव अभी तय होना बाकी है।

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