Tata Trusts ने परोपकार के लिए बांटे 1556 करोड़ रुपये, बनाएगा 50 गैर लाभकारी अस्पताल

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 18, 2026

देश के प्रमुख परमार्थ समूह में शामिल टाटा ट्रस्ट ने बीते वित्त वर्ष (2025-26) में परोपकार से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए 1,556.31 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। अब टाटा ट्रस्ट देश में 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पताल का नेटवर्क स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने ट्रस्ट की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में यह बात कही है।

उन्होंने कहा कि किसी परमार्थ संस्था के काम का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि उसने कितने लोगों तक पहुंच बनाई या कितनी राशि खर्च की, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि उसके प्रयासों से लोगों के जीवन में क्या बदलाव आया। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में संस्थागत अनुदान और सीधे परियोजनाओं पर 1,353.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि व्यक्तिगत अनुदान के रूप में 202.99 करोड़ रुपये दिए गए। विभिन्न क्षेत्रों में ग्रामीण विकास को सबसे अधिक 457.62 करोड़ रुपये मिले।

इसके बाद शिक्षा पर 270.26 करोड़ रुपये, कैंसर उपचार पर 178.46 करोड़ रुपये, संस्थानों के विकास पर 169.31 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य सेवाओं पर 105.97 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जल एवं स्वच्छता के लिए 59.04 करोड़ रुपये और पोषण के लिए 57.64 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। व्यक्तिगत अनुदान में चिकित्सा सहायता का हिस्सा सबसे अधिक रहा।

इसके तहत 143.30 करोड़ रुपये दिए गए, जबकि शिक्षा के लिए 59.38 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। ट्रस्ट ने वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए स्वास्थ्य संबंधी रणनीति तैयार की है। इसके तहत प्रमुख राज्यों के लगभग 75 विकास खंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और 35 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में 100 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस योजना के तहत लगभग 25 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य है। इसके अलावा, 20 हजार से अधिक अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर प्रशिक्षण देने की भी योजना है। वित्त वर्ष 2025-26 में ट्रस्ट के कैंसर उपचार कार्यक्रम के तहत 1,06,626 बाह्य रोगी परामर्श दिए गए।

इस दौरान कीमोथेरेपी के 24,874 चक्र पूरे किए गए और 2,879 शल्य चिकित्सा प्रक्रियाएं की गईं। वहीं, 29,638 मरीजों को विकिरण चिकित्सा (रेडियोथेरेपी) उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम के तहत 13,031 नए मरीजों को इलाज मुहैया कराया गया।

नोएल टाटा ने कहा कि भारत के कई प्रतिभाशाली युवा ऐसे अवसरों की तलाश में विदेश चले जाते हैं, जो उन्हें देश में उपलब्ध नहीं हो पाते। ऐसे में भारत को ऐसे संस्थानों की आवश्यकता है, जो युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने और अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करने का अवसर दें। टाटा ने कहा कि भारत में परोपकार का स्वरूप बदल रहा है।

उद्यमियों की नई पीढ़ी सामाजिक कार्यों में अधिक महत्वाकांक्षा और सक्रियता के साथ आगे आ रही है। ऐसे में पुराने संस्थानों को भी अपनी कार्यक्षमता, दक्षता और जवाबदेही के मानकों को बेहतर बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा बनने की कोशिश करने से पहले सबसे बेहतर बनने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि केवल आकार बढ़ाने की होड़ अक्सर अच्छे परिणाम नहीं देती।

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