By अंकित सिंह | Aug 25, 2026
सोमवार को कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन भारत ने श्रीलंका को बैकफुट पर रखा। इस दौरान भारतीय तेज़ गेंदबाज़ प्रसिद्ध कृष्णा ने कहा कि उनका आक्रामक रवैया मैदान पर उनके व्यवहार से नहीं, बल्कि उनकी गेंदबाज़ी की तीव्रता और अनुशासन से झलकता है। उनका मानना है कि पिच और हालात के हिसाब से उनकी गेंदबाज़ी की लंबाई बदलती रहती है, और टीम के एनालिस्ट और कोच उन्हें सही जगह गेंदबाज़ी करने में मदद करते हैं।
उन्होंने कहा कि पिच के हिसाब से बॉलिंग की लेंथ बदलती रहती है। इसलिए हम एनालिस्ट और कोच के साथ बैठकर तय करते हैं कि अलग-अलग पिच पर किस लेंथ से बॉलिंग करनी है। और हाँ, जब मैं देश के लिए नहीं खेल रहा था, तब मैं अपनी 'नेचुरल लेंथ' की बात कर सकता था, लेकिन यहाँ मुझे टीम की ज़रूरत के हिसाब से हर तरह की लेंथ पर बॉलिंग करनी पड़ती है, और मैं वही करने की कोशिश कर रहा हूँ।
कृष्णा ने पहले टेस्ट में तीन विकेट लिए, जिसमें भारत 165 रनों से जीता; उन्होंने पहली पारी में एक और दूसरी पारी में दो विकेट लिए। मोहम्मद सिराज के साथ मिलकर उन्होंने नई गेंद से श्रीलंकाई बल्लेबाजों को बांधे रखा, लगातार मुश्किल लेंथ पर गेंदबाज़ी की और दबाव बनाए रखा। कृष्णा ने लाहिरू उदारा के आउट होने में कोलंबो की पिच से मिली थोड़ी सी सीम मूवमेंट को श्रेय दिया और यशस्वी जायसवाल के शानदार कैच की तारीफ़ की। उन्होंने स्लिप कॉर्डन के महत्व पर भी ज़ोर दिया और कहा कि अच्छी गेंदबाज़ी से बने मौकों को भुनाना उतना ही ज़रूरी है जितना कि गेंद का बल्ले के किनारे (एज) से टकराना।
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