By Ankit Jaiswal | Apr 24, 2026
वैश्विक टेक उद्योग में एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। एक तरफ बड़ी कंपनियां भविष्य की तकनीकों, खासकर एआई पर भारी निवेश कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों की नौकरियां जा रही हैं। बता दें कि पिछले एक महीने में ही कई बड़ी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी या स्वैच्छिक निकासी योजनाएं लागू की हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
मेटा ने अपने कर्मचारियों की संख्या में लगभग 10 प्रतिशत तक कटौती करने की योजना बनाई है, जो करीब 8 हजार नौकरियों के बराबर है। साथ ही कंपनी ने कई नई भर्तियों को भी रोक दिया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आने वाले समय में एआई काम करने के तरीकों को पूरी तरह बदल सकती है। इसी दिशा में कंपनी इस वर्ष बड़े स्तर पर निवेश कर रही है।
वहीं ओरेकल में छंटनी का असर और ज्यादा व्यापक बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां लगभग 30 हजार कर्मचारियों पर असर पड़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अचानक सूचना दी गई, जिससे असंतोष भी देखने को मिला है। कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी और इसमें तकनीकी आधार का उपयोग किया गया है।
दूसरी ओर माइक्रोसॉफ्ट ने सीधे छंटनी की बजाय एक अलग तरीका अपनाया है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों को स्वैच्छिक निकासी का विकल्प दिया है, जिसके तहत वे आर्थिक सहायता के साथ नौकरी छोड़ सकते हैं। यह कदम भी कंपनी के बदलते कारोबारी ढांचे और एआई में बढ़ते निवेश से जुड़ा माना जा रहा है।
गौरतलब है कि तकनीकी क्षेत्र में यह बदलाव केवल नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि काम करने के तरीके और कौशल की मांग भी तेजी से बदल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने के मॉडल की ओर बढ़ सकती हैं, जहां स्वचालन और एआई की भूमिका अहम होगी।
यह दौर तकनीकी उद्योग के लिए बदलाव का संकेत दे रहा है, जहां एक ओर भविष्य की तकनीकों पर फोकस बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक नौकरियों पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों मौजूद है।