Changing Face of Terror | 26/11 के हमले से भारत ने क्या सीखा?|Teh Tak Chapter 3

By अभिनय आकाश | Dec 30, 2025

एक ऐसा हादसा जिसका सिलसिला मौत से भी खत्म नहीं होता, मौत के बाद जो शुरू होता है उस गम का नाम 26/11 है, जिंदगी जहां से एक नए रास्ते पर चलती है उस मोड़ का नाम 26/11 है। आदमी को आदमी होने पर अगर शर्म आती है उस मंजिल का नाम 26/11 है। क्योंकि हिन्दुस्तान में इससे पहले इस तरह का हमला कभी नहीं देखा गया था। 26 नवंबर 2008 को 10 आतंकियों के आतंक से न सिर्फ मुंबई कांपी बल्कि देश भी थर्रा उठा। खौफ का ऐसा सच जो मुंबई के जेहन में ताउम्र रहेगी। साल क्या दशक भी गुजर जाए तो 26/11 के आतंक की तस्वीर मुंबई को डराती रहेगी। 10 आतंकियों ने मुंबई को खून से रंग डाला। पूरा देश थर्रा उठा। पूरे 60 घंटे तक मुंबई में सिर्फ गोलियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। होटल ताज से लेकर होटल ट्राइडेंट तक, नरीमन हाउस से लेकर मुंबई की सड़कों तक फिर आतंकियों को नेस्तनाबूद करने के लिए देश के वीरों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। मुंबई पुलिस से लेकर रैपिड एक्शन फोर्स और एनएसजी कमांडो ने आतंक के खिलाफ अपने-अपने हथियारों के मुंह खोल दिए। नौ आतंकी मार दिए गए और सबसे खूंखार आतंकी अजमल आमिर कसाब को जिंदा गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी पर लटका दिया गया।

इसे भी पढ़ें: Changing Face of Terror | लोन वुल्फ से हाइब्रिड वार तक: आतंक की नई शक्ल | Teh Tak Chapter 1

26 नवंबर 2008 को वो दिन था जब पूरा देश मुंबई में हुए आतंकी हमले की वजह से सहम गया था। हमले में मारे गए लोगों के परिवार और घायलों के जख्म अभी भी ताजा हैं। आज ही के दिन समुद्री रास्ते से आए लश्कर-ए-तयैबा के दस आतंकियों ने मुंबई को बम धमाकों और गोलीबारी से दहला दिया था। हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे और तीन सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मुंबई हमले को याद करके आज भी लोगों का दिल दहल उठता है।

कराची से रास्ते मुंबई आए थे आतंकी

इस हमले की शुरुआत कुछ इस तरह हुई। हमले से तीन दिन पहले यानि 23 नवंबर को कराची से नाव के रास्ते ये आतंकी मुंबई में घुसे। ये भारतीय नाव से मुंबई पहुंचे थे। जिस भारतीय नाव पर ये आतंकी सवार थे, उस पर इन्होंने कब्जा किया था और उस पर सवार चार भारतीयों को मौत के घाट उतार दिया था। रात के तकरीबन आठ बजे ये हमलावर कोलाबा के पास कफ परेड के मछली बाजार पर उतरे। वहां से वे चार समूहों में बंट गए और टैक्सी लेकर अपनी मंजिलों का रूख किया

मछुवारों को इनके आतंकी होने का हुआ था शक

बताया जाता है कि इन लोगों को मछली बाजार में उतरते देख वहां के कुछ मछुवारों को शक भी हुआ था और उन्होंने इस बात की जानकारी पुलिस को भी दी थी, लेकिन इलाक़े की पुलिस ने इस पर कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी और न ही आगे बड़े अधिकारियों या खुफिया बलों को जानकारी दी।

रात 9 बजकर 10 मिनट- सीएसटी स्टेशन

रात का 9.10 बजा था। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर धीरे-धीरे भीड़ छटने लगी थी कि तभी सेंट्रल रेलवे हेडक्वार्टर बिल्डिंग में गोली की आवाजों के बीच चारों तरफ सिर्फ चीख पुकार और चित्कार की आवाजें आने लगीं। हर तरफ लोग भाग रहे थे, हर कोई अपनी जान बचाना चाह रहा था। आतंकियों की बंदूकों से निकली गोली ने करीब 52 लोगों की जान ले ली थी। वह 26 नवंबर की काली रात थी।आतंकी अजमल कसाब को मुंबई की छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था।

इसे भी पढ़ें: Changing Face of Terror | मॉर्डन टेररिज्म की पटकथा: भारत ने पहले भुगता, पश्चिम ने बाद में समझा| Teh Tak Chapter 2

रात 9 बजकर 38 मिनट- ताज होटल: आंतक की गिरफ्त में ताज का हिस्सा

आतंकियों ने होटल ताज को पूरी तरह से अपने गिरफ्त में लिया था। अंदर लोग बंधक बने हुए थे। जिनमें कई विदेशी भी शामिल थे। आतंक जारी थी। इसी दौरान होटल में रैपिड एक्शन फोर्स, एनएसजी कमांडो ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। पूरे 60 घंटों तक आतंकवादियों और जवानों के बीच जंग चलती रही। इस दौरान आग लगी, गोलियां चली और बंधकों को लेकर उम्मीदें टूटती और जुड़ती रही। आखिरकार देश के जांबाजों की गोलियों ने आतंकियों को मौत के घाट उतार डाला।

रात 10 बजे- होटल ओबरॉय में आतंक

कारोबारियों के लिए लोकप्रिय ओबेरॉय होटल में हमलावर ढेरों गोले-बारूद के साथ घुसे थे। यहां 350 से ज्यादा लोग मौजूद थे। हमलावरों ने यहां कई लोगों को बंधक भी बना लिया। एनएससी के जवानों ने दोनों हमलावरों को मार दिया लेकिन तब तक 32 लोगों की जान जा चुकी थी।

रात 10 बजकर 25 मिनट- नरीमन हाउस

यहूदी पर्यटकों के स्थल नरीमन हाउस में भी दो आतंकवादियों ने जमकर तांडव मचाया। यहां उन्होंने कई लोगों को बंधक बना लिया। सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में सभी आतंकवादी मारे गए लेकिन बंधक बनाए गए लोगों को भी नहीं बचाया जा सका।

कामा अस्पताल और लियोपोल्ड कैफे में गोलीबारी

अपने विदेशी ग्राहकों के लिए मशहूर लियोपोल्ड कैफे में दो हमलावरों ने जमकर गोलियां चलाईं। इस गोलीबारी में 10 लोग मारे गए थे। हालांकि, दोनों हमलावरों को भी सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया। कामा अस्पताल में भी आतंकियों ने जमकर गोलीबारी की। यहां 4 हमलावरों ने पुलिस के एक वैन को अगवा कर लिया। आतंकवादियों से एनकाउंटर के दौरान एटीएस चीफ हेमंत करकरे, मुंबई पुलिस के अधिकारी अशोक काम्टे और विजय सालस्कर शहीद हो गए।

एनएसजी टीम ने दिया जबरदस्त जांबाजी का परिचय

आतंकी हमले के खिलाफ आपरेशन चलाने की जिम्मेदारी एनएसजी को सौंपी गई थी। लगभग 60 घंटे तक आपरेशन चला था। 9 आतंकवादियों को मार गिराया गया था जबकि एक आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था। जिसे 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गई।

बढ़ाई गई तटीय सुरक्षा

पाकिस्तान से आतंकी समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे थे। हमले के बाद सरकार ने इस ओर ध्यान दिया और देश के तटों की सुरक्षा मजबूत की गई। भारतीय तटों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी नौसेना को सौंप दी गई। इंडिया कोस्ट गार्ड इस काम में उसकी मदद करता है। समुद्री पुलिस की स्थापना की गई, जो समुद्र में पांच नौटिकल माइल्स तक की सुरक्षा करती है।

इसे भी पढ़ें: Changing Face of Terror | 26/11 ने कैसे गढ़ी वैश्विक ‘फिदायीन’ आतंक की पटकथा |Teh Tak Chapter 4


 

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Kerala का स्वच्छता में बड़ा कीर्तिमान, Minister MB Rajesh बोले- Top 100 Clean Cities में शामिल

Harsh Sanghavi का अलग अंदाज, Surat में बुजुर्गों संग खेली Holi, बोले- वर्षों से यह मेरा परिवार है

Perfect Game की बात नहीं हुई, England के खिलाफ Semifinal से पहले Morne Morkel ने बताई Team India की रणनीति

राजीव चंद्रशेखर का Congress-CPM पर हमला, बोले- Gulf में मलयाली खतरे में, आप चुप क्यों?