By अभिनय आकाश | Oct 22, 2026
याद कीजिए 2011 का वो दौर जब अन्ना हजारे ने जनलोकपाल बिल के समर्थन में दिल्ली के जंतर मंतर से आंदोलन और आमरण अनशन की शुरुआत की थी। इस आंदोलन ने देश भर में भ्रष्टाचार विरोधी लहर को जन्म दिया और बाद में 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' और आम आदमी पार्टी की नींव रखी गई। इसी जंतर मंतर की धूप में झाड़ू थाम अरविंद केजरीवाल ने आद आदमी पार्टी बनाई। लेकिन इसके साथ ही ये समझा कि अगर सड़क से उठकर सत्ता में आना है तो बिजली, पानी और मोहल्ला क्लीनिक जैसे आम लोगों के जरूरतों को हिट करना जरूरी है। फ्री-बिज मॉडल ने केजरीवाल को दिल्ली में 2013, 2015, 2020 यानी सत्ता की हैट्रिक लगाई। वहीं दूसरी तरफ बिहार की धूल भरी पगडंडियों पर प्रशांत किशोर (पीके) थे, जिन्होंने जन सुराज को किसी रील या हंगामे के सहारे नहीं, बल्कि तीन हजार किलोमीटर की कठोर पदयात्रा, डेटा और बूथ स्तर के संगठन पर खड़ा किया था। अब देश के मुख्यन्यायधीश के व्यंग्य से उपजी कॉकरोच जनता पार्टी की बात करें तो जिसके पास न प्रशांत किशोर जैसा धैर्य था, न आप जैसा कैडर। उनके पास बस सोशल मीडिया की एक लहर थी, जो जितनी तेजी से उठी, उतनी ही तेजी से पुलिस के पहले बैरिकेड के सामने रेत की तरह बिखरती नजर आ रही है।
यह कोई आकस्मिक आंदोलन नहीं, बल्कि वर्षों के चुनावी प्रबंधन के बाद सुनियोजित तरीके से बनाई गई एक राजनीतिक पार्टी है। बिहार के पारंपरिक लालू-नीतीश-भाजपा के त्रिकोण को तोड़ना। प्रशांत किशोर ने 3,000 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा कर गांव-गांव जाकर इसे सीधे सत्ता हासिल करने के विकल्प के रूप में खड़ा किया। प्रशांत किशोर सीधे जनता के बीच रात बिताते हैं, सभाएं करते हैं और जातिगत संतुलन को साधते हुए स्थानीय मुद्दों पर बात करते हैं। जन सुराज का एकमात्र लक्ष्य बिहार विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाना और प्रशांत किशोर को एक वैकल्पिक मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करना है।
यह मुख्य रूप से डिजिटल आक्रोश, मीम संस्कृति और युवाओं के संस्थागत असंतोष से उपजा एक अनौपचारिक छात्र-युवा समूह है। इसका नाम और प्रतीक (कॉकरोच) व्यवस्था पर एक तीखा व्यंग्य है। शुरुआत में पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे सीधे छात्रों से जुड़े मुद्दे थे, जो बाद में चुनाव आयोग (ECI), एसआईआर (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे जैसी बड़ी संस्थागत मांगों में बदल गए। पू जिलों में 'जन सुराज अभियान समितियां' बनाई गई हैं। प्रशांत किशोर की टीम ने हर पंचायत और प्रखंड स्तर पर रिटायर्ड नौकरशाहों, डॉक्टरों, शिक्षकों और स्थानीय प्रभावशाली चेहरों को जोड़कर एक ठोस इलेक्टोरल मशीनरी तैयार की है। इसके पास कोई औपचारिक सदस्यता अभियान, बूथ अध्यक्ष या जिला स्तर की कमेटियां नहीं हैं। कोई बड़ा औपचारिक वित्तीय आधार नहीं। क्राउडफंडिंग या विपक्षी दलों और छात्र संगठनों द्वारा दिए जाने वाले तात्कालिक लॉजिस्टिक सहयोग पर निर्भर। इसका मकसद चुनाव लड़ना या सीटें जीतना नहीं है। यह एक 'प्रेशर ग्रुप' (दबाव समूह) है। इसका उद्देश्य सत्ताधारी दल की संस्थागत कमियों को उजागर करना और मुख्य विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) को सड़कों पर एक युवा, आक्रामक नैरेटिव उपलब्ध कराना है।
कुल मिलाकर कहे तो सीजेपी 'आक्रोश की क्षणिक लहर' है, जन सुराज 'रणनीति और आंकड़ों से गढ़ी गई चुनावी परियोजना' है, और आम आदमी पार्टी 'सड़क के आंदोलन से निकलकर राजभवन तक पहुंची एक स्थापित सत्ता' है। सीजेपी की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि वह अपने सोशल मीडिया गुस्से को न तो संगठन में बदल पा रही है और न ही आम जनता की बुनियादी जरूरतों से जोड़ पा रही है।