By अभिनय आकाश | Sep 30, 2026
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने वारंगल में बनने वाले ममनूर एयरपोर्ट का नाम रखने के लिए जनता से सुझाव मांगे हैं। इस फ़ैसले ने काकतीय इतिहास और प्रतीकों को लेकर राज्य सरकार के रुख़ पर बहस फिर से शुरू कर दी है। सुझावों में रानी रुद्रमा देवी, काकतीय और प्रतापरुद्र जैसे काकतीय-युग के कई नाम सामने आए हैं, जिनमें रानी रुद्रमा देवी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। यह बहस इसलिए चर्चा में है क्योंकि दो साल पहले रेड्डी ने तेलंगाना के प्रस्तावित नए आधिकारिक प्रतीक में 'काकतीय कला तोरणम' को शामिल करने का विरोध किया था। उन्होंने इसे "अराजकता का प्रतीक" बताया था और कहा था कि राज्य के प्रतीकों में तेलंगाना आंदोलन और उसके संघर्षों की झलक होनी चाहिए। इसलिए, एयरपोर्ट का नाम बदलने की प्रक्रिया ने काकतीय विरासत को फिर से राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है। इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि सरकार इस राजवंश की ऐतिहासिक विरासत और तेलंगाना की सार्वजनिक पहचान में इसके स्थान को किस नज़रिए से देखती है।
प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए कई नाम सुझाए गए हैं। वारंगल के रहने वाले फिल्ममेकर संदीप रेड्डी वांगा ने 'रुद्रमा इंटरनेशनल एयरपोर्ट' या 'काकतीय इंटरनेशनल एयरपोर्ट' में से किसी एक नाम का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है। चर्चा में शामिल अन्य नामों में 'सम्क्का-सरलम्मा' और पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नाम भी हैं। काकतीय-युग से जुड़े सुझावों में, रानी रुद्रमा देवी का नाम मौजूदा चर्चा में प्रमुख विकल्पों में से एक के तौर पर उभरा है, हालांकि अभी औपचारिक मंज़ूरी की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। ऐतिहासिक रूप से 'ओरुगल्लू' के नाम से जाना जाने वाला वारंगल, काकतीय राजवंश की राजधानी था और आज भी इसके शासकों से गहराई से जुड़ा हुआ है। शहर के मध्ययुगीन इतिहास से जुड़े प्रमुख नामों में रुद्र देव, गणपतिदेव, रुद्रमा देवी और प्रतापरुद्र शामिल हैं।