Shaksgam Valley को लेकर भारत-चीन के बीच तनाव, CPEC के लिए निर्माण कार्य पर MEA की चेतावनी

By अभिनय आकाश | Jan 12, 2026

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक कहावत है कि जहां पर आपका ध्यान है वहां पर कुछ नहीं होता और जहां पर आपकी नजरें नहीं जाती असली खेल वहीं हो रहा होता है। भारत के तमाम डिफेंस एक्सपर्ट हो या फिर पॉलिटिकल एनालिसिस जो करने वाले हैं वह हैं। सबका ध्यान ईरान तो वेनेजुएला तो अमेरिका तो ट्रंप तो यूक्रेन रूस ये सब पे रहा लेकिन हम चूक गए हैं। हमारा ध्यान चीन की तरफ नहीं गया और इस बीच चीन ने खेला कर दिया। खेला हुआ नहीं है लेकिन खेला करने की तैयारी भरपूर थी। कुछ दिनों पहले आपने सुना होगा कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन ने अपना दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश के एक दो नागरिकों को अपने यहां पकड़ा और यह कहा कि भाई ये तुम्हारा भारतीय पासपोर्ट यहां काम नहीं करेगा क्योंकि अरुणाचल चीन का हिस्सा है।

अरुणाचल पे हमारा दावा आज भी है और ठोस दावा हैअरुणाचल पर प्रेशर बढ़ाते-बढ़ाते चीन ने एक और कांड कर दिया। अ सुदूर जब आप लेह लद्दाख जाते हैं ना तो जिस भाग को पाकिस्तान ने चीन को दिया था यानी अक्साई चीन का इलाका उसका और हमारे जम्मू कश्मीर के इलाके के बीच एक वैली है वैली घाटी जिसका नाम है शक्सगाम घाटीअब चीन ने वहां पे रोड बनाना शुरू कर दियाअचानक सेटेलाइट की तस्वीरें आई और सेटेलाइट तस्वीरों में यह नजर आने लगा कि चीन तो बड़े धड़ल्ले से शक्षगाम घाटी में रोड बना रहा है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को भी मान्यता नहीं देते, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है जिसपर पाकिस्तान का अवैध और जबरन कब्जा है। जायसवाल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सबसे पहले तो जिस क्षेत्र का आप उल्लेख कर रहे हैं, वह चीन का हिस्सा है।” उन्होंने कहा, “अपने ही क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियां बिल्कुल उचित हैंमाओ ने कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में सीमा समझौता किया था और दोनों देशों के बीच सीमा तय की गई थीउन्होंने कहा कि यह संप्रभु देशों के रूप में चीन और पाकिस्तान का अधिकार है

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सीपीईसी को लेकर भारत की ओर से आलोचना किए जाने पर माओ ने बीजिंग के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि यह एक आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय आर्थिकसामाजिक विकास करना और लोगों की जीवन में सुधार लाना हैउन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते और सीपीईसी से कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इस मामले में चीन का रुख अपरिवर्तित हैकश्मीर मुद्दे पर चीन का आधिकारिक रुख यह है कि जम्मू-कश्मीर विवाद लंबे समय से चलारहा है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर,सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार उचितशांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिएचीन इस रुख को दोहराता रहा हैशक्सगाम घाटी में चीन की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े एक सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैंयह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है

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