Strait of Hormuz में बढ़ा तनाव, भारत की Oil-Gas Supply पर मंडराया संकट

By Ankit Jaiswal | Apr 13, 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत टूटने के बाद अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान से जुड़े जहाजों पर समुद्री रोक लगाने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। हालांकि साफ किया गया है कि यह पूरी तरह से रास्ता बंद करने जैसा कदम नहीं होगा, बल्कि सिर्फ ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों को निशाना बनाया जाएगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत ने साल 2019 के बाद से ईरान से तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी, लेकिन अब सात साल बाद एक बार फिर ईरानी तेल की एक खेप आने वाली है। इसके बावजूद भारत की बड़ी निर्भरता इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों पर बनी हुई है, जिनकी आपूर्ति भी इसी मार्ग से होती है।

गौरतलब है कि अभी तक भारत आने वाले जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति मिलती रही है। ईरान ने “गैर-विरोधी” देशों के जहाजों को सीमित तौर पर रास्ता दिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अगर अमेरिका अपनी योजना लागू करता है तो यह व्यवस्था जारी रहेगी या नहीं।

इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जलडमरूमध्य में हल्की सी भी बाधा आने पर कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर मानी जा रही है। बता दें कि देश अपनी कुल जरूरत का करीब 60 प्रतिशत गैस आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। हाल के दिनों में कई जगहों पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति में देरी और कमी की शिकायतें सामने आई हैं। व्यावसायिक उपयोग करने वालों पर इसका ज्यादा असर पड़ा है, जबकि घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

मौजूद हालात यह भी संकेत दे रहे हैं कि अगर स्थिति और बिगड़ती है तो महंगाई पर असर पड़ सकता है। तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का आयात खर्च बढ़ेगा, जिससे रुपये पर दबाव और रोजमर्रा की चीजों के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है।

गौरतलब है कि भारत ने पिछले कुछ सालों में अपने तेल स्रोतों को विविध बनाया है, जिससे तत्काल आपूर्ति संकट की संभावना कम होती है। लेकिन फिर भी खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यही कारण है कि इस समुद्री मार्ग की स्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।

फिलहाल जहाजों की आवाजाही जारी है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते स्थिति कभी भी बदल सकती है। ऐसे में सरकार और बाजार दोनों ही आने वाले घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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