By रेनू तिवारी | Jun 03, 2026
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) द्वारा एक पाक समर्थित संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने इस कार्रवाई के लिए एटीएस को बधाई दी है। साथ ही, उन्होंने इस मामले को लेकर सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) को कटघरे में खड़ा किया है।
कट्टरपंथ का जाल: पाकिस्तान में बैठे आका सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए मोहम्मद शेख को कट्टरपंथी बना रहे थे।
युवाओं की भर्ती: वह आतंकी नेटवर्क के गुर्गों के संपर्क में था और स्थानीय युवाओं को इस दलदल में धकेलने का प्रयास कर रहा था।
'टेस्ट मिशन': एजेंसी ने खुलासा किया कि शेख को दूसरे राज्य की एक महिला नेता को धमकी देने का एक "टेस्ट मिशन" भी सौंपा गया था।
एटीएस ने संदिग्ध के पास से एक 9mm पिस्टल, चार कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किया है। शेख के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम (UAPA) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि उसे दूसरे राज्य की एक महिला नेता को धमकी देने का ‘‘टेस्ट मिशन’’ भी सौंपा गया था। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख राजभर ने गिरफ्तारी को सपा से जोड़ते हुए आरोप लगाया, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण है कि आतंकियों को उस क्षेत्र से पकड़ा जा रहा है जिसे सपा का गढ़ माना जाता है।
इसका मतलब है कि सपा नेता आजमगढ़ में आतंकियों को संरक्षण देते हैं।हालांकि, मंत्री ने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।
आजमगढ़ पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा का प्रमुख गढ़ माना जाता है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव वर्तमान में यहां से सांसद हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जिले की सभी 10 सीटें जीती थीं।
एटीएस ने शेख के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। उसके पास से नौ एमएम पिस्टल, चार कारतूस और मोबाइल फोन बरामद हुआ है। लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और ऐसे अंतरराष्ट्रीय मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण जरूरी है। एक अधिकारी ने कहा कि गहन जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है, क्योंकि कानूनी कार्रवाई जारी है।