By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 08, 2026
ठाणे, आठ नवंबर महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने वर्ष 2008 में दंगा और मारपीट करने के मामले में 21 लोगों को बरी कर दिया है। यह घटना उसी साल 25 अगस्त को ठाणे के टेंभी नाका और टावर नाका में दही हांडी उत्सव के दौरान हुई थी। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे और उनके वाहनों को नुकसान पहुंचा था।
जोगेश्वरी के जय जवान गोविंदा समूह और मझगांव गोविंदा समूह के बीच किसी बात को लेकर झड़प हो गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से पत्थर और बोतलें फेंकी गईं। कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए निरीक्षक रामदास हरिलाल राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस दल मौके पर पहुंचा।
हालांकि, दोनों समूहों ने पुलिस दल पर ही हमला कर दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और उनके वाहनों में तोड़फोड़ की गई। इस मामले में ठाणे नगर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की सार्वजनिक सेवक पर हमला, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। वर्ष 2025 में आरोप तय किए गए थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज ए पाटकी ने शनिवार को दिए आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपियों ने पुलिसकर्मियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने में क्या भूमिका निभाई थी। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष के लिए यह साबित करना जरूरी था कि आरोपियों ने एक समान उद्देश्य से गैरकानूनी जमावड़ा किया था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभियोजन पक्ष ने चार गवाहों के बयान दर्ज कराए, लेकिन शिकायतकर्ता राठौड़ का पता नहीं चलने के कारण उसकी गवाही नहीं हो सकी, जबकि कई अन्य गवाहों की मौत हो चुकी थी।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी ने स्वयं स्वीकार किया था कि घटनास्थल पर एक हजार से अधिक लोग जमा थे, ऐसे में आरोपियों की पहचान साबित करना बेहद जरूरी था। अदालत ने कहा कि घायल पुलिसकर्मियों ने आरोपियों की मौजूदगी या घटना में उनकी भूमिका के बारे में कुछ नहीं बताया। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने सभी 21 आरोपियों को बरी कर दिया।