Operation Sheruwali के तहत Rajouri के जंगलों में सेना का सबसे बड़ा ऑपरेशन और गहराया, LoC पर घिर गए आतंकी!

By नीरज कुमार दुबे | Jun 04, 2026

जम्मू-कश्मीर की सरजमीं पर आतंक के खिलाफ निर्णायक जंग अब अपने सबसे तेज और आक्रामक दौर में पहुंच चुकी है। राजौरी के घने जंगलों में पिछले तेरह दिनों से चल रहा विशाल संयुक्त अभियान ‘शेरुवाली’ इस बात का साफ संकेत है कि अब सुरक्षा बल आतंक के हर अड्डे को जड़ से उखाड़ फेंकने के इरादे से मैदान में उतर चुके हैं। सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर जिस तरह से सीमावर्ती इलाकों को घेरकर आतंकियों की तलाश में दिन रात जुटी हैं, उसने पाकिस्तान समर्थित आतंकी तंत्र की बेचैनी बढ़ा दी है। राजौरी के जंगलों में लगातार तलाशी अभियान चल रहा है और हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

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सेना ने साफ कर दिया है कि नियंत्रण रेखा पर किसी भी तरह की घुसपैठ या आतंकी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीमावर्ती इलाकों में मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है और हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियानगत तैयारियों पर संतोष जताते हुए कहा कि भारत की सीमाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर स्तर पर पूरी ताकत झोंकी जा रही है।

दूसरी ओर पुंछ जिले में भी सुरक्षा व्यवस्था को अभेद बनाने की कवायद तेज हो चुकी है। राजौरी पुंछ रेंज के उप महानिरीक्षक संदीप वजीर ने नियंत्रण रेखा से लगे सवजियां और आंगनपथरी जैसे अग्रिम इलाकों का दौरा कर सुरक्षा हालात की समीक्षा की। उन्होंने सीमा पर तैनात पुलिसकर्मियों को किसी भी उभरते खतरे से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए। साफ कहा गया कि सतर्कता में जरा-सी ढील भी भारी पड़ सकती है। निगरानी तंत्र को और मजबूत करने तथा सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

डीआईजी ने ग्राम रक्षा गार्ड के सदस्यों और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में स्थानीय लोगों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। यह संदेश भी स्पष्ट था कि आतंकवाद केवल सुरक्षा बलों की चुनौती नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सामूहिक लड़ाई है।

इसी बीच घाटी के भीतर छिपे आतंकी नेटवर्क पर भी बड़ा प्रहार किया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर इकाई ने आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामले में श्रीनगर, बांदीपोरा, कुपवाड़ा, अनंतनाग, कुलगाम और बारामूला समेत छह जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। आठ अलग-अलग ठिकानों पर की गई इस कार्रवाई ने आतंक के स्लीपर सेल नेटवर्क की जड़ों को हिला दिया है। जांच एजेंसियों को लंबे समय से ऐसे लोगों की तलाश थी जो गुप्त संचार माध्यमों के जरिए पाकिस्तान में बैठे आतंकी आकाओं के संपर्क में थे।

जांच में यह भी सामने आया है कि कट्टरपंथ फैलाने, युवाओं को बरगलाने और आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश वर्षों से सुनियोजित तरीके से चलाई जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियां अब ऐसे पूरे तंत्र को ध्वस्त करने में जुटी हैं जो घाटी में अशांति फैलाने का काम कर रहा था। साफ है कि जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ अब केवल जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि आर-पार की रणनीति पर काम हो रहा है। सीमा पर चौकसी, जंगलों में घेराबंदी, खुफिया नेटवर्क की मजबूती और आतंकी समर्थकों पर लगातार कार्रवाई यह बता रही है कि भारत अब आतंक के हर चेहरे को बेनकाब कर निर्णायक प्रहार करने के मूड में है।

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