By महेन्द्र तिवारी | Oct 16, 2026
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को इक्कीसवीं सदी की सबसे प्रभावशाली तकनीकी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। चिकित्सा, शिक्षा, कृषि, उद्योग, संचार और प्रशासन तक इसका विस्तार नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। बड़ी कंपनियां इस तकनीक को विकसित करने और अपने कारोबार में शामिल करने के लिए भारी धनराशि खर्च कर रही हैं। लेकिन जब किसी नई तकनीक के प्रति उम्मीदें बहुत तेजी से बढ़ती हैं, तब उसके साथ जुड़े आर्थिक जोखिम भी बढ़ने लगते हैं। 15 अक्टूबर 2026 को वैश्विक शेयर बाजारों में दिखाई दी उथल-पुथल ने इसी प्रश्न को सामने ला दिया है कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता में किया जा रहा विशाल निवेश भविष्य में अपेक्षित लाभ दे पाएगा।
रॉयटर्स की रिपोर्टों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के बीच निवेशकों ने सरकारी बांड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश साधनों की ओर रुख किया। दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार विशेष रूप से प्रभावित हुआ। वहां प्रमुख शेयर सूचकांक कोस्पी 7.57 प्रतिशत गिरकर 5,554.22 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान गिरावट इतनी तेज थी कि कुछ समय के लिए व्यापार रोकना पड़ा। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी प्रमुख अर्धचालक कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। जापान का शेयर बाजार भी इस वैश्विक दबाव से अछूता नहीं रहा। इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी के साथ-साथ उनकी आशंकाएं भी बढ़ रही हैं।