By मनोज झा | Jan 19, 2018
मौका सभी को मिलता है लेकिन उसे भुनाने का तरीका हर किसी को नहीं आता। हज यात्रा पर दी जाने वाली सब्सिडी खत्म करने का फैसला लेकर मोदी सरकार ने कांग्रेस को यही संदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में ही कह दिया था कि हज पर सब्सिडी खत्म होनी चाहिए...लेकिन कांग्रेस अल्पसंख्यकों को नाराज नहीं करना चाहती थी लिहाजा उसने हज सब्सिडी खत्म करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब जब मोदी सरकार ने हज सब्सिडी खत्म करने का फैसला लिया तो उसके पास कहने को कुछ नहीं बचा है।
अगर हज सब्सिडी पर खर्च की जाने वाली राशि के आंकड़ों की बात करें तो 2012 में 836 करोड़, 2013 में 680 करोड़ और साल 2014 में 533 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। जरा सोचिए अगर इतनी बड़ी रकम गरीब मुस्लिम बच्चों की शिक्षा पर खर्च होता तो उनका कितना भला होता। अब मुस्लिम उलेमाओं को ये बात भले ही बुरी लगे लेकिन मोदी सरकार ने मुसलमानों को शैक्षिक तौर पर मजबूत करने के लिए प्लान तैयार कर लिया है। मोदी सरकार मदरसों को आधुनिक बनाने के लिए नई योजना पर काम कर रही है। मदरसों को लेकर सबसे बड़ा काम यूपी में हो रहा है। योगी सरकार ने अपने यहां सभी मदरसों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। यूपी में मदरसों के प्रबंधन में पिछले कई सालों से गड़बड़ी की शिकायत आ रही थी। मदरसों को फंड कहां से मिल रहा है इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। राज्य सरकार का मानना है कि रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के फैसले के बाद अब सरकार की हर मदरसे पर नजर होगी।
हज सब्सिडी की शुरुआत 1954 में हुई थी और तब से हर साल हज पर जाने वाले मुस्लिमों को हवाई यात्रा और दूसरी सुविधाओं में सब्सिडी दी जा रही थी। मोदी पहले भी कई मौकों पर साफ कर चुके हैं कि वो बड़े फैसले लेने में नहीं हिचकेंगे। हज सब्सिडी से पहले तीन तलाक पर कानून बनाने का फैसला भी क्रांतिकारी कदम था। वैसे तीन तलाक पर अभी राज्यसभा में विधेयक पास नहीं हुआ है लेकिन सरकार को उम्मीद है कि तीन तलाक पर कानून बनाने में उसे ज्यादा परेशानी नहीं होगी। 2019 में चुनाव से पहले मोदी सरकार जिस तरह बड़े फैसले ले रही है उसने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है।
- मनोज झा