Prajatantra: टेढ़ी खीर है पंजाब-दिल्ली में सीटों का बंटवारा, क्या गलेगी AAP और कांग्रेस की दाल?

By अंकित सिंह | Jan 09, 2024

आखिरकार इंडिया गठबंधन में लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लेकर चर्चा की शुरुआत हो गई है। रविवार को जहां राजद और कांग्रेस की बैठक थी तो वहीं सोमवार को आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं की बैठक हुई और दिल्ली तथा पंजाब में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा की गई। कांग्रेस को कमजोर कर दिल्ली और पंजाब में सबसे बड़ी पार्टी बनी आम आदमी पार्टी पर इस चर्चा के दौरान सबकी निगाहें थी। हालांकि, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की ओर से चर्चा को सार्थक बताया गया है और दावा किया क्या है कि आने वाले दिनों में फिर से बात की जाएगी। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि बातचीत के दौरान लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर कोई फार्मूला नहीं निकल सका है।

बैठक से क्या निकला

सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस को तीन लोकसभा सीटें देने का प्रस्ताव रखा। दिल्ली में लोकसभा के 7 सीटें हैं। 2019 के चुनाव में सभी सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी। कांग्रेस को 22 फ़ीसदी तो आम आदमी पार्टी को 18% वोट मिले थे। इसके अलावा पंजाब में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को 6 सीटों का ऑफर दिया है। पंजाब की कुल 13 सीटों में से 2019 में कांग्रेस ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस की टेंशन को बढ़ाते हुए आम आदमी पार्टी ने हरियाणा की कुल 10 सीटों में से तीन पर दावा ठोक दिया। वहीं, गोवा की दो लोकसभा सीटों में से एक पर चुनाव लड़ने की बात कही है। इतना ही नहीं, गुजरात के एक लोकसभा सीट पर भी आम आदमी पार्टी अपनी दावेदारी कर रही है। आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की भरूच लोकसभा सीट से चैतर वसावा की उम्मीदवारी का भी ऐलान कर दिया है। वसावाइस समय जेल में बंद हैं।

फिर से चर्चा को मजबूर कांग्रेस

दिल्ली और पंजाब तो ठीक है लेकिन गुजरात, गोवा और हरियाणा में सीटें मांग कर आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। यही कारण है कि कांग्रेस एक बार फिर से मंथन पर मजबूर हुई है। जब से आप इंडिया गठबंधन में शामिल हुई, तब से इस बात को लेकर दावा किया जा रहा था की दोनों पार्टियों में दिल्ली और पंजाब में सीट बंटवारे पर ही बात होगी। लेकिन गोवा और हरियाणा को लेकर आम आदमी पार्टी की डिमांड गठबंधन में पेंच फंसा सकती है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी ने जो फार्मूला दिया है उसको कांग्रेस स्वीकार कर सकती है और उदारता दिखा सकती है। लेकिन हरियाणा, गुजरात और गोवा में कांग्रेस समझौते को लेकर तैयार नहीं होगी। 

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स्थानीय नेता गठबंधन के पक्ष में नहीं

दिल्ली और पंजाब की बात करें तो यहां आम आदमी पार्टी और कांग्रेस लगातार आमने-सामने हैं। दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस को ही सत्ता से दूर कर आम आदमी पार्टी सत्ता में आई है। यही कारण है कि दोनों पार्टियों के स्थानीय नेता किसी भी प्रकार के समझौते के पक्ष में नहीं है। स्थानीय नेताओं का मानना है कि भले ही ऊपर के नेताओं के हाथ मिल जाए लेकिन कार्यकर्ताओं के दिल नहीं मिल सकते हैं। दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने आलाकमान को कह दिया है कि हम अकेले चुनाव लड़ना चाहते हैं। पंजाब कांग्रेस प्रमुख वडिंग ने कहा कि इस (सीट-बंटवारे) को लेकर मुझसे कोई चर्चा नहीं हुई है। हमें सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कहा गया है और हम सभी पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में कहीं ना कहीं गठबंधन को लेकर दोनों ही दलों में आने वाले समय में पेंच फंसेगा। 

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