बंगाल विधानसभा चुनावों से पूर्व फिर खेल हुआ प्रारंभ, आखिर कब तक बचाव कर पाएंगी ममता दीदी?

By मृत्युंजय दीक्षित | Apr 04, 2026

वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधनासभा चुनाव घोषित हो चुके हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राज्य की राजनीति का पारा चढ़ रहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए अपने प्रचार को आक्रामक बना चुकी हैं। उनके लिए इस बार राह उतनी आसान नहीं है। भारतीय जनता पार्टी भी इस बार हर हाल में बंगाल में अपनी सरकार बनाने को संकल्पबद्ध है। बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा में कहा था कि गंगा नदी बिहार से ही बंगाल में जाती है और उसी दिन से  बंगाल मे राजनीतिक तपिश का अनुभव होने लगा था। 

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चुनाव आयोग की तरफ से मतदाता सूची के शुद्धीकरण के गहन अभियान को ममता बनर्जी ने जिस तरह बाधित करने का प्रयास किया उससे उनकी अपनी ही छवि ख़राब हुई है। मतदाता शुद्धीकरण अभियान के दौरान ममता बनर्जी व उनकी पार्टी ने पूरा दम लगा दिया कि किसी  प्रकार इस कार्य को बाधित किया जाए या रोक दिया जाए। ममता की ओर से एसआईआर को लेकर भ्रम पैदा करने के पूरे प्रयास किए गए जिसमें  उनकी ओर से पहले कहा गया कि वह एसआईआर फार्म नहीं भरेंगी और फिर उन्होंने भर भी दिया। 

आई पैक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान ममता जी जिस तरह पुलिस लेकर पहुँच गयीं वह हास्यास्पद था लेकिन अब उनके लिए अत्यंत गंभीर समस्या बनने जा रहा है। अब आई पैक का प्रकरण हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। ममता दीदी ने कहा है कि बीजेपी ईडी के सहारे उनकी पार्टी की रणनीति चुराना चाहती है। आई-पैक प्रकरण को लेकर वह अत्यंत आक्रामक मुद्रा हैं। आई-पैक प्रकारण में ग्रीन फाइल को लेकर प्रश्न किया जा रहा है कि आखिर उन ग्रीन फाईल में ऐसा क्या था जिसे पाने के लिए ममता दीदी ने राज्य पुलिस की पूरी ताकत लगा दी। अब ईडी उन फाईल्स को तत्काल पाने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है। अदालत में दोनों ही पक्षों ने अपनी-अपनी याचिकाएं लगा दी है। आई-पैक प्रकरण में ईडी की छापेमारी की खबर मीडिया में आग की तरह फैली और उसके बाद से ही  कोलकाता से लेकर नई दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तीव्र हो गई। 

टीवी चैनलों पर संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमने वाले आ गए और कहा जाने लगा कि चुनाव से दो-तीन महीने पहले ही यह छापेमारी क्यों शुरू हो जाती है? जबकि वास्तविकता यह है कि यह जांच काफी समय से चल रही है इस घोटाले की जांच रुकवाने के लिए तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने एक याचिका दायर की थी जो खारिज हो चुकी है। ईडी का यह छापा तृणमूल कांग्रेस आईटी सेल के हेड प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर पड़ा था और माना जा रहा है कि उनके रिश्ते चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भी हैं बिहार में अपनी सरकार बनने का सपना देखने वाले प्रशांत किशोर बंगाल में ममता दीदी के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक हैं। यही कारण है कि जब ईडी का छापा पड़ा और ममता दीदी की पुलिस ने ईडी के कब्जे से ग्रीन फाइल अपने कब्जे में ली तभी से यह आरोप लगाया जाने लगा कि आखिर ममता दीदी की दाल में कुछ तो काला है । आखिर क्यों उन्हें ग्रीन फाइलों से इतना लगाव है? पहले ममता जी धमकी देते हुए कह रही थीं  कि अगर वह बीजेपी के कार्यालाय में घुस गयीं तो क्या हो जाएगा और अब कह रही हैं कि जब बीजेपी को पता चला कि अबकी बार बीजेपी को पहले की तुलना में भी कम सीटें आ रही हैं  तब उन्होंने हमारी रणनीति चुराने का प्रयास किया। जबकि प्रवर्तन निदेशालय ने अब सरकारी काम में बाधा डालने तथा कोयला घोटाले में ममता दीदी व तृणमूल सरकार को आरोपी बनाने का फैसला किया है। 

ममता दीदी के सामने अब वैसी गंभीर चुनौती है जैसी दिल्ली के मुख्यंमत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष आ गई थी। अगर ममता दीदी को कोर्ट से राहत नहीं मिलती या वे ग्रीन फाइल्स को लेकर जांच एजेंसियों के साथ टकराव का रास्ता अपनाती हैं तो केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने पर मजबूर हो सकती है। बंगाल में लंबे समय से कई अवसरों पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग भाजपा व अन्य संगठनों की ओर से लगातार की जा रही है किंतु अभी तक केंद्र की राजग सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जबकि राज्य में चुनावों के समय तृणमूल कांग्रेस के संगठित अपराधियों द्वारा चुनावी हिंसा का दौर प्रांरभ हो जाता है जिसके शिकार भाजपा व हिंदू संगठनो के कार्यकर्ता होते हैं। अभी आई -पैक प्रकरण के दौरान  मची हलचल के बीच  भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की कार पर हमला बोला गया और वह आरोपियों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। 

ऐसा नहीं है कि ममता दीदी का जांच एजेंसियों के साथ टकराव पहली बार हुआ हो इससे पहले 27 अक्तूबर 2023 को जब राशन घोटाले में तत्कालीन मंत्री ज्योतिप्रिया मल्लिक को गिरफ्तार किया तब ममता उनके बचाव में उतरीं थीं। 11 अगस्त 2022 सीबीआई ने पशु तस्करी में तृणमूल नेता अनुव्रत मंडल को गिरफ्तार किया वह भी ममता दीदी के करीबी थे। 23 जुलाई 2022 को स्कूल भर्ती घोटाले में ईडी ने शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया। 6 सितबर 2021 को नारद स्टिंग केस में सीबीआई ने तृणमूल नेताओं को गिरफ्तार किया तब ममता दीदी ने सीबीआई के कार्यालय के बाहर 6 घंटे धरना दिया। 6 सिंतबर 2021 को ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी से कोयला घोटाले में 9 घंटे तक पूछताछ हो चुकी हैं। बंगाल के राजनीतिक इतिहास में सबसे बड़ा शरदा चिटफड घोटाला हुआ है जिसकी जांच के दायरे में ममता दीदी सीधे फंसी हुई हैं । 

आगामी सप्ताह में बंगाल की राजनीति और चटखदार होने वाली है क्योंकि अब दोनों पक्षों नें एक दूसरे पर वार-पलटवार तेज कर दिए हैं। अदालतों का निर्णय बंगाल विधानसभा चुनावों की दिशा और दशा तय करने वाले हो सकते हैं। 

- मृत्युंजय दीक्षित

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