भोजन की बर्बादी से निपटने की वैश्विक चुनौती?

By डॉ. रमेश ठाकुर | Oct 16, 2026

भोजन मूलभूत आवश्यकताओं के अलावा, प्रत्येक इंसान का बुनियादी अधिकार भी है। भोजन अनमोल है जिसका सम्मान करना सभी का कर्तव्य है। आज ‘विश्व खाद्य दिवस’ है जो सालाना 16 अक्टूबर को पूरे संसार में इस मकसद से मनाया जाता है कि अन्न की बर्बादी को रोकने के लिए जनमानस को जागरूक किया जाए। नवंबर 1979 को संयुक्त राष्ट् के खाद्य एवं कृषि संगठन के 20वें सम्मेलन में खाद्य दिवस को मनाने का निर्णय हुआ जिसका पहली बार आयोजन वर्ष 1981 में हुआ। दुनिया में भूख से बढ़ते कुपोषण पर नियंत्रण को ध्यान में रखकर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक संघों को चेताया था। ये दिवस इस बात पर ज्यादा जोर देता है कि हमें थाली में उतना ही भोजन परोसना चाहिए, जितने की पेट को जरूरत हो। ज्यादा भोजन लेंगे तो निश्चित रूप से बर्बाद ही होगा। फूड इंडेक्स पर यूएनईपी-2024 की रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुस्तान में सालाना करीब 7.8 करोड़ टन भोजन बर्बाद होता है, जिसका औसत लगभग 21.4 करोड़ किलोग्राम प्रतिदिन आंका गया। विश्व खाद दिवस-2025 की थीम थी ‘बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य साथ-साथ’ जो एग्रीफूड सिस्टम को बदलने में वैश्विक सहयोग की शक्ति को उजागर करती है।

इसे भी पढ़ें: छात्रः सपनों की उड़ान से सृजन की पहचान तक

तमाम ऐसे इस्लामिक देश हैं जो भारत में उत्पादित बासमती चावल ही पसंद करते हैं। ईरान-ईराक में चावल की सप्लाई सिर्फ भारत से ही होती है। अन्न निर्यात के लिहाज से भारत विश्व का बड़ा बाजार बनकर इस समय उभरा है। संसार में भारत दूध और बाजरे के निर्माण में नंबर वन पायदान है। वर्ष 2014 के बाद से हिंदुस्तान शहद, अंडे, मछलियां और फल-सब्जियों के उत्पादन में दूसरे स्थान पर काबिज हुआ है। जबकि, कभी चौथे स्थान पर हुआ करता था।

भूखे सोना विकसित संसार के माथे पर कलंक जैसा है। भूख के आंकड़े आज भी डरावने हैं। संसार का एक बड़ा इंसानी हिस्सा अभी भी रात में भूखे पेट सोता है। जबकि, रोजाना जितनी भोजन की बर्बादी होती है, थालियों में खाने को व्यर्थ करके लोग फेंक देते हैं, अगर ऐसा ना किया जाए, तो भूखे सोने वालों के आंकड़ों में कमी लाई जा सकती है।

भोजन की बर्बादी से न केवल अन्न और धन का नुकसान होता है, बल्कि पानी, बिजली और अन्नदाताओं की सालाना मेहनत भी बेकार होती है। इससे पर्यावरण पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। भूख से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सभी देशों को चेताना होगा। भूख और अन्न बर्बादी के नियंत्रण पर भारत जैसी पहल अन्य देशों को भी करनी होगी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, पीएम पोषण योजना, अंत्योदय अन्न योजना, राइस फोर्टिफिकेशन और प्राइस स्अेबिलाइजेशन फंड जैसी प्रमुख पहले भारत की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ कर रही हैं। भारत में 80 करोड़ लोग मुफत अन्न वितरण योजना के लाभार्थी हैं, इसलिए सरकार का प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति भूखे पेट नहीं सोए। लेकिन भोजन की बर्बादी भारत में भी कम नहीं है। आंकड़े इस समस्या के गवाह हैं।

विश्व खाद्य दिवस संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन की स्थापना का प्रतीक है जिसे पहली बार औपचारिक रूप से 1981 में ‘भोजन सर्वप्रथम’ विषय वस्तु के साथ मनाया गया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1984 में इस दिवस को मान्यता दी जिसके बाद एक साथ 150 देशों का समूह बना, जो सामूहिक प्रयासों से भूख और अन्न बर्बादी से लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि, सफलता उतनी नहीं मिली, जितनी उम्मीदें लगाई गईं थीं। बहरहाल, आज का दिन खाद्य सुरक्षा, पोषण टिकाउ, कृषि पद्वतियों के विषय में ना सिर्फ जागरूक करता है, बल्कि सुरक्षित, पर्याप्त और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता में आने वाली चुनौतियों से लड़ने की सीख भी देता है। भोजन मानव जीवन का आधार है। स्वास्थ्य विकास और कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक भी। हालांकि, दुख तब होता है जब खाद्य उत्पादन में वैश्विक प्रगति के बाद भी असंख्य लोग अभी भी भूख और कुपोषण का सामना कर रहे हैं। भोजन पर सभी का मौलिक अधिकार है, जिसे कोई नहीं छीन सकता। भोजन हीन इंसान को भोजन उपलब्ध करवाना प्रत्येक हुकूमत का पहला कर्तव्य होता है।

- डॉ. रमेश ठाकुर
सदस्य, राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD), भारत सरकार!

प्रमुख खबरें

Biopic बने तो मेरा किरदार निभाएं Priyanka Chopra, बोलीं गोलकीपर Savita Punia

Prahaar The Untold Story of Ujjwal Nikam Movie Review | प्रोपेगैंडा के दौर में एक ईमानदार और संतुलित सिनेमाई प्रयास

एक ही दिन में है Maha Ashtami और महानवमी , जानिए सही तिथि और कन्या पूजन का समय

Supreme Court ने Sanjay Raut और निखिल वागले को जारी किया अवमानना नोटिस