By रेनू तिवारी | Jul 27, 2026
देश में सार्वजनिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की सुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार एक बेहद कड़ा कदम उठाने जा रही है। पेपर लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों (Unfair Means) के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए सरकार सोमवार को लोकसभा में एक नया संशोधन विधेयक पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024' में संशोधन से संबंधित इस महत्वपूर्ण विधेयक को सोमवार की सदन की कार्यसूची में सूचीबद्ध (Listed) कर दिया गया है।
सदस्यों को वितरित विधेयक की प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। विधेयक में संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी। विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है। ये अदालतें आरोपपत्र दाखिल किए जाने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी।
नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन और फिर शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार यह विधेयक पेश करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति बनाने की घोषणा भी की है।
युवाओं के भविष्य की सुरक्षा का संकल्प
संसद में इस विधेयक के पारित होने से देशभर के लाखों अभ्यर्थियों और छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य है कि त्वरित न्याय और सख्त सजा के माध्यम से पेपर लीक सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए ताकि मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके।