By नीरज कुमार दुबे | Apr 13, 2024
असम में लोकसभा की 14 सीटें हैं। प्रभासाक्षी की चुनाव यात्रा को लेकर जब हम विभिन्न क्षेत्रों में पहुँचे तो हमने पाया कि धुबरी और करीमगंज को छोड़ दें तो बाकी सभी सीटों पर भाजपा और एनडीए के प्रत्याशियों को बढ़त हासिल है। लोकसभा चुनाव से पहले जब संशोधित नागरिकता कानून के नियम बनाये गये थे तब लगा था कि असम में यह मुद्दा भाजपा को भारी पड़ सकता है। लेकिन भाजपा ने जिस तरह यहां विरोध कर रहे लोगों को समझाया उसका असर यह हुआ कि सीएए को लेकर अब कोई सुगबुगाहट नहीं है। यहीं नहीं जिस तरह मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा कह रहे हैं कि चुनावों के बाद हम राज्य में समान नागरिक संहिता यानि यूसीसी लागू करेंगे उसका भी अधिकतर लोग स्वागत कर रहे हैं। हमने पाया कि असम में विकास, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादों और गारंटी पर लोगों का विश्वास और महिलाओं का भरपूर समर्थन भाजपा की बड़ी ताकत बन चुका है।
हमने जब युवाओं से रोजगार को लेकर उनकी राय पूछी तो उन्होंने कहा कि आपको यहां हर तरफ विकास कार्य होते दिख जाएंगे। कहीं पुल बन रहे हैं तो कहीं सड़कें बन रही हैं तो कहीं अन्य बुनियादी ढांचे की परियोजना पर काम हो रहा है। युवाओं ने कहा कि विकास परियोजनाएं रोजगार भी लाती हैं इसलिए यह कहना कि रोजगार नहीं मिल रहा है वह गलत है। युवाओं ने कहा कि यदि कोई घर पर ही बैठे-बैठे रोजगार का इंतजार करेगा तो कभी नहीं मिलेगा। युवाओं ने कहा कि सिर्फ नौकरी के पीछे भागना गलत है आज स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है उसका लाभ लिया जा सकता है।
कई लोगों ने हमसे यह भी कहा कि इस चुनाव में राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा है क्योंकि भाजपा ने हिंदुओं का सपना पूरा कर दिया है। लोगों ने कहा कि इस बार रामनवमी पर हमारा उत्साह चरम पर होगा। लोगों ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री अपने धर्म और संस्कृति का आदर करने और उसका प्रचार प्रसार करने का संदेश दे रहे हैं उससे खासतौर पर युवा वर्ग सही राह पर चल रहा है। कई लोगों ने यह भी कहा कि असम ड्रग्स और धर्मांतरण की चपेट में आ चुका था लेकिन अब उस पर काफी हद तक रोक लग गयी है क्योंकि मुख्यमंत्री के कड़े रुख के चलते पुलिस और प्रशासन हमेशा सतर्क रहता है।