Iran-Israel-America की जंग से पूरा पश्चिम एशिया धधका, खाड़ी से लेकर लेबनान तक हो रही मिसाइलों की बारिश

By नीरज कुमार दुबे | Mar 02, 2026

पश्चिम एशिया में तनाव ने भीषण रूप ले लिया है और ईरान, इजराइल तथा अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। सोमवार को संघर्ष का दायरा अचानक बढ़ गया जब तेहरान समर्थित मिलिशिया भी खुलकर मैदान में उतर आईं और हमलों का भूगोल कई देशों तक फैल गया। ईरान ने इजराइल और कई अरब देशों पर मिसाइलें दागीं, जबकि लेबनान से हिजबुल्लाह ने रॉकेट और ड्रोन के जरिये इजराइल को निशाना बनाया। जवाब में इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों और दक्षिणी लेबनान पर भारी हवाई हमले किये, जिनमें कम से कम 31 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इजराइल ने एक लाख से अधिक आरक्षित सैनिकों को जुटा लिया है और लम्बे संघर्ष की चेतावनी दी है।

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उधर, संघर्ष के बीच कुवैत में एक चौंकाने वाली घटना सामने आयी। अमेरिकी सेना ने कहा कि सक्रिय युद्ध अभियान के दौरान कुवैत की वायु सुरक्षा ने गलती से तीन अमेरिकी एफ 15 ई लड़ाकू विमानों को मार गिराया। सभी छह चालक सुरक्षित बाहर निकल आये और उन्हें बचा लिया गया। घटना की जांच जारी है। इस बीच तेहरान समर्थित समूहों द्वारा कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर को भी निशाना बनाये जाने की खबर है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है।

इस बीच, ऊर्जा सुरक्षा पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ईरानी ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब की रस तनुरा रिफाइनरी को प्रभावित किया, जिससे अस्थायी रूप से संचालन ठप करना पड़ा। यह संयंत्र प्रतिदिन पांच लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का प्रसंस्करण करता है। होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास हमलों और धमकियों ने वैश्विक आपूर्ति मार्गों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने कहा है कि फिलहाल ईरान के परमाणु स्थलों को नुकसान का संकेत नहीं है, लेकिन सक्रिय रिएक्टरों की मौजूदगी किसी गंभीर रेडियोलाजिकल हादसे का जोखिम बढ़ाती है।

तनाव का असर खाड़ी क्षेत्र से बाहर भी दिखा। ओमान के तट से 52 समुद्री मील दूर एमकेडी व्योम नामक तेल टैंकर पर मानवरहित नौका से हमला किया गया, जिससे इंजन कक्ष में विस्फोट और आग लग गयी। इस घटना में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गयी। बढ़ते संघर्ष के बीच हवाई क्षेत्र बंद किये जा रहे हैं, दूतावासों ने चेतावनी जारी की है और कई देशों ने अपने नागरिकों की निकासी शुरू कर दी है। इस बीच, ईरान ने इजराइली प्रधानमंत्री के कार्यालय को भी निशाना बनाने का दावा किया है।

उधर, वाशिंगटन और तेल अवीव को उम्मीद थी कि शीर्ष नेतृत्व को हटाने से ईरान की सत्ता संरचना दरक जायेगी, लेकिन तेहरान ने त्वरित उत्तराधिकार और सैन्य सक्रियता से संकेत दिया है कि व्यवस्था इतनी आसानी से बिखरने वाली नहीं है। अब सवाल यह है कि क्या यह निर्णायक प्रहार अपेक्षित परिणाम देगा या फिर पूरा क्षेत्र और गहरे अस्थिरता के दौर में धकेल दिया जायेगा। बहरहाल, आइये देखते हैं रक्षा विशेषज्ञ कर्नल टीपी त्यागी इस मुद्दे पर क्या कह रहे हैं।

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