By दीपक कुमार त्यागी | Aug 06, 2024
बांग्लादेश निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले परिवारों के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी मिलने वाले 30 फीसदी आरक्षण को हटाने की मांग को लेकर के देश के छात्र लंबे समय से सड़कों पर उतर करके हिंसक आंदोलन करके जान गंवा रहे थे। लेकिन बांग्लादेश की सरकार ने छात्रों की भावनाओं को अनदेखा करते हुए आरक्षण के इस बेहद ज्वलंत बन चुके मुद्दे को कभी हाइकोर्ट व कभी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की आड़ में अटकाए व भटकाएं रखा हुआ था। जिसके चलते ही 5 अगस्त 2024 की दोपहर को आरक्षण का यह मुद्दा शेख हसीना की सरकार को आखिरकार ले ही डूबा। छात्रों के आरक्षण विरोध की जबरदस्त आग के चलते अब बांग्लादेश में तख्तापलट हो गया है, छात्रों ने संसद, पीएम हाउस आदि तक पर भी अपना कब्जा कर लिया है, गुस्से की आग में झुलस रहे छात्रों ने बांग्लादेश के संस्थापक मुजीबुर्रहमान की मूर्ति तक को भी नहीं बख्शा है। हालांकि बांग्लादेश देश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 5 अगस्त की दोपहर को ही अपने पद से इस्तीफा देकर के बंग्लादेश को सुरक्षित रूप से छोड़ दिया है। जबरदस्त हिंसा की आग में झुलसते बांग्लादेश की राजधानी ढाका से पीएम शेख हसीना फिलहाल सुरक्षित भारत के दिल्ली से सटे गाजियाबाद में बने हिंडन एयरबेस पहुंच गयी हैं। वहीं बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष ने हिंसा रोकने के लिए पुलिस को हटाकर के देश को पूरी तरह से सेना के हवाले कर दिया है और उन्होंने छात्रों को उनकी मांग मानने का आश्वासन देते हुए देश में जल्द ही अंतरिम सरकार का गठन करने की घोषणा की है।
लेकिन भारत की सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाएं रखने के लिए अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि भारत आज ऐसे पड़ोसी देशों की सीमाओं से घिर गया है, जहां पर जबरदस्त ढंग से हिंसा व अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। भारत के पड़ोसी बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, मालदीव आदि में माहौल बेहद ही अस्थिरता पूर्ण बना हुआ है। इन देशों में भारत के कट्टर दुश्मन चीन की मज़बूत पकड़ तेजी से बनती जा रही है, जो स्थिति भारत के लिए चिंताजनक है। अस्थिर पड़ोसी देशों के दोर में भारत को अब बेहद ही सावधान रहना होगा, अपनी सीमाओं पर होने वाली हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नज़र बनाए रखना होगा। सीमा से लगते देशों के बाहरी व अंदरुनी मामलों पर भी हर पल तेज नज़र बनाए रखनी होगी। विशेषकर बांग्लादेश से लगने वाले राज्य बंगाल में अब भारत सरकार को बहुत ही ध्यान देना होगा, भारत के अंदर भी धार्मिक व जातिगत उन्माद को बनने से रोकना होगा, तब ही भविष्य में भारत भी पूरी तरह से सुरक्षित रह सकता है।
- दीपक कुमार त्यागी
वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार व राजनीतिक विश्लेषक