दक्षिण राज्यों में कमल खिलाने की तैयारी ! भाजपा की लचीलेपन वाली रणनीति का सबसे सटीक विश्लेषण

By अनुराग गुप्ता | Jul 11, 2022

भाजपा ने दक्षिणी राज्यों में जिस तरह पांव पसारने का प्रयास शुरू किया है उससे वहां राज कर रही राजनीतिक पार्टियों की नींद उड़ गई है। आज की तारीख में हर राजनीतिक दल जानता है कि भाजपा जो लक्ष्य निर्धारित करती है उसे हासिल भी करती है, इसीलिए चाहे वर्षों से सत्ता में जमे हुए परिवारवादी दल हों या फिर द्रविड़ पार्टियां, सभी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार को बाध्य हो रहे हैं। प्रभासाक्षी के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में संपादक नीरज कुमार दुबे के साथ भाजपा की दक्षिण संबंधी रणनीति की समीक्षा की गयी। 

इसे भी पढ़ें: छात्र और राष्ट्रहित में समर्पित है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

इसी बीच संपादक ने परिवारवाद राजनीति का जिक्र किया और यह स्पष्ट किया कि परिवारवाद की राजनीति का उल्लेख महज कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए नहीं है। बल्कि उन तमाम पार्टियों से है जो परिवारवाद को बढ़ावा देते हैं। जैसे डीएमके, टीआरएस, एआईएडीएमके... हर पार्टियों में कलह है और यह पार्टियां मौजूदा हालातों के बारे में सोचती हैं। जबकि भाजपा दूरगामी सोच के आधार पर काम करती है।

उन्होंने बताया कि हो सकता है कि तमाम पार्टियां और लोग यह सोचे कि भाजपा को सिर्फ चुनाव जीतने से मतलब है लेकिन ऐसा नहीं है। तभी तो पार्टी ने हिमाचल और गुजरात चुनाव के साथ-साथ लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियां शुरू कर दीं और उसी दिशा की तरफ आगे बढ़ रही है। दक्षिण की बात की जाए तो हैदराबाद में दो दिनों तक चली भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तेलंगाना में कमल खिलाने को लेकर प्रस्ताव पास किया गया और यह भी माना गया कि हम दक्षिणी राज्यों में कमजोर हैं। ऐसे में पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा पर आगे बढ़ रही है।

इसे भी पढ़ें: सरकार और विपक्ष मिलकर प्रयास करते तो निर्विरोध हो सकता था राष्ट्रपति चुनाव

राजनीतिक समीकरणों की बात की जाए तो भाजपा ने दक्षिण राज्यों से 4 नामी हस्तियों को राज्यसभा भेजा। इसे जरिए पार्टी ने न सिर्फ समीकरण साधने की कोशिश की बल्कि उस वर्ग और समाज के लोगों को संदेश दिया कि उनकी भागीदारी भी देश की उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी उत्तर भारत के लोगों की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी मध्य प्रदेश में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम आवास योजना का जिक्र करते हैं, उनके लाभार्थियों से बातचीत करते हैं तो वो फिर दक्षिण के राज्यों में भी जाकर ऐसा ही करते हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि दक्षिण हमसे कोई अलग नहीं है और यह योजना हिंदुस्तान के हर राज्यों के लिए बराबर है।

- अनुराग गुप्ता

प्रमुख खबरें

Komal Rani Swarnkar की पोस्ट ने मचाई हलचल, बिना नाम लिए किस पर साधा निशाना?

टिहरी में छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप में डॉ. Suryamani Bhandari पर POCSO और BNS के तहत केस दर्ज

Android और iPhone में Battery Drain रोकें, Settings से बदलें Background Apps परमिशन

Ajay Devgn ने जुहू बीच पर की सफाई, युवाओं से की देश और शहर को साफ रखने की अपील