Bharat Bandh News: मजदूरों और किसानों की देशव्यापी हड़ताल से कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित

By नीरज कुमार दुबे | Feb 12, 2026

केंद्रीय श्रमिक संगठनों और किसान समूहों के आह्वान पर आज देशभर में भारत बंद के तहत व्यापक हड़ताल और प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। हम आपको बता दें कि श्रमिक संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर और किसान हितों के खिलाफ तथा बड़ी कंपनियों के पक्ष में हैं। इसी के विरोध में दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच ने यह राष्ट्रव्यापी कदम उठाया है जिसे कई किसान संगठनों, छात्र समूहों और युवा संगठनों का भी समर्थन मिला है।

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हड़ताल के कारण कई जगह जनजीवन पर असर देखा गया। बैंकिंग, बीमा, डाक, परिवहन, खनन, गैस पाइपलाइन और बिजली जैसे क्षेत्रों में आंशिक बाधा की आशंका पहले ही जताई गई थी। हालांकि अस्पताल, आपात सेवाएं, निजी कार्यालय, मेट्रो सेवा और जरूरी आपूर्ति सेवाएं चालू हैं ताकि आम लोगों को बहुत अधिक कठिनाई न हो।

केरल में हड़ताल का व्यापक असर दिखा है। राज्य में सरकारी बसें और अधिकतर निजी बसें सड़कों से गायब रहीं, जिससे कार्यालयों में उपस्थिति कम रही। राज्य सरकार ने पहले ही आदेश जारी कर कहा था कि बिना अनुमति अनुपस्थिति रहने पर उस दिन का वेतन काटा जा सकता है। फिर भी परिवहन सेवा ठप रहने से कई कर्मचारी ड्यूटी तक नहीं पहुंच सके। ऑटो यूनियन ने भी सेवा नहीं देने की घोषणा की। कोच्चि मेट्रो और ऑनलाइन टैक्सी सेवा चालू रहने से कुछ राहत मिली। शबरिमला में पूजा के लिए जाने वाले यात्रियों को ध्यान में रख कर कुछ विशेष बसें चलाने की बात कही गई।

तमिलनाडु और केरल के बीच अंतरराज्यीय बस सेवा पूरी तरह रुकी रही। कन्याकुमारी जिले से केरल जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। केरल की राज्य बसें वडसेरी बस अड्डे से नहीं चलीं, जबकि तमिलनाडु की बसें केवल सीमा तक कालियाकाविलई तक चलीं। सीमा पार सेवा बंद रहने से रोज आना जाना करने वाले लोग रास्ते में फंसे रहे। ओडिशा में कई ट्रेड यूनियनों ने मिलकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर लिए, नारे लगाए और मजदूर एकता का संदेश दिया। बालासोर रेलवे स्टेशन पर कुछ कार्यकर्ताओं ने ट्रेन आवाजाही रोकने की कोशिश की, जिससे कुछ समय के लिए रेल सेवा प्रभावित हुई। पुलिस और प्रशासन ने स्थिति संभालने का प्रयास किया।

पंजाब में बंद को मजबूत समर्थन मिलने की खबरें आईं। वहां सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी ने भी बंद के प्रति समर्थन जताया। कई जगह रैलियां और धरना आयोजित किए गए जिनमें किसान और मजदूर दोनों शामिल हुए। तमिलनाडु में द्रमुक ने भी हड़ताल को समर्थन दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि किसान, मजदूर और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा के बिना कानून लाए गए। मदुरै सहित कई शहरों में विभिन्न यूनियनों ने साझा कार्यक्रमों की घोषणा की और केंद्र सरकार से नीतियों पर पुनर्विचार की मांग की।

इसके विपरीत पश्चिम बंगाल में बंद का असर अपेक्षाकृत हल्का रहा। कोलकाता और अन्य जिलों में बस और अन्य वाहन सामान्य रूप से चलते रहे। सरकारी और निजी कार्यालयों में उपस्थिति सामान्य रही और स्कूल भी खुले रहे। हालांकि वाम दल से जुड़े छात्र संगठनों ने कुछ विश्वविद्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर बंद का समर्थन जताया। किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस बल तैनात रहा।

इस बीच संसद परिसर में भी विपक्षी सांसदों ने श्रमिक संगठनों के बंद के समर्थन में तथा भारत अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किया और सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। सांसदों ने बैनर और पोस्टर के साथ नारे लगाए और समझौते की शर्तें सार्वजनिक करने की मांग की।

आज के बंद को लेकर श्रमिक संगठनों का दावा है कि करोड़ों मजदूर इस आंदोलन से जुड़े हैं और यह केवल एक दिन का विरोध नहीं बल्कि नीतिगत बदलाव की मांग का संकेत है। देखा जाये तो आज का भारत बंद इस बात का संकेत है कि रोजगार, मजदूरी, खेती और जनकल्याण से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रहेंगे।

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