बैंकों के चैक पर लिखे नंबर्स भी खोलते हैं कई 'राज', ध्यानपूर्वक समझ लीजिए आज

By कमलेश पांडे | Mar 28, 2025

प्रायः बैंक का इस्तेमाल करने वाले कई लोग अधिकतर सुरक्षित लेन-देन के लिए चेक का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इसके जरिए आर्थिक लेन-देन की प्रक्रिया को काफी आसान व सुरक्षित माना जाता है। ऐसे में यदि आप भी चेक का इस्तेमाल करते हैं तो आपने देखा होगा कि हर चेक में नीचे की ओर कुछ नम्बर्स अंकित होते हैं। दरअसल ये नंबर इन चेकों पर यू हीं नहीं दिए जाते, बल्कि इन नंबरों में सम्बन्धित बैंक और आपके बैंक अकाउंट की अमूमन हर जानकारी छिपी होती है। लिहाजा, आज हम आपको यहां बताएंगे कि चेक पर लिखे उन नंबर्स में क्या-क्या राज छिपे होते हैं।

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बैंक विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका पहला भाग यानी पहला 3 अंक (एक से तीन तक) सिटी कोड होता है, जिससे पता चलता है कि चेक किस शहर से जारी किया गया है। वहीं इसका दूसरा भाग यानी उससे अगले 3 अंक (चार से छह तक) सम्बन्धित बैंक का कोड होता है, जो हर बैंक के लिए विशिष्ट यानी अलग अलग होता है। उदाहरण के लिए ICICI बैंक का 229 और HDFC का 240। इसी तरह आपके चेक में भी बैंक कोड लिखा होता है। वहीं, इसका  तीसरा भाग यानी अंतिम 3 अंक (सात से नौ तक) सम्बन्धित बैंक की शाखा का कोड होता है, जो हर बैंक की शाखा के लिए विशिष्ट यानी अलग अलग होता है। 

इसके अलावा, एक चेक नंबर भी होता है जो 6 अंकों का एक विशिष्ट नंबर होता है जो चेक की स्थिति यानी भुनाया गया है या नहीं, को दर्शाता है। यह चेक के ऊपरी कोने में या नीचे बाईं ओर लिखा होता है। इस चेक नंबर का इस्तेमाल ट्रैकिंग और रिकॉर्ड के लिए किया जाता है। वहीं, इसमें एक आईएफएससी कोड (IFSC Code) होता है जिसका मतलब है Indian Financial System Code. यह 11 अंकों का कोड होता है, जो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स (NEFT, RTGS, IMPS) के लिए जरूरी होता है। क्योंकि IFSC कोड में बैंक और उसकी शाखा की विशेष पहचान होती है। वहीं, इसमें एक बैंक ब्रांच कोड भी होता है, जो उस बैंक की शाखा को दर्शाता है, जहां से चेक जारी किया गया है। यह MICR कोड या IFSC कोड का ही हिस्सा होता है।

वहीं, कुछ चेकों में खाता संख्या यानी Account Number भी छपा होता है, जिससे संबंधित खाते की पहचान की जा सकती है। इन नंबरों की जानकारी रखने से आप अपने बैंकिंग लेन-देन को अधिक सुरक्षित और आसान बना सकते हैं। हालांकि पुराने चेक बुक में बैंक अकाउंट का नंबर लिखा नहीं होता था लेकिन अब चेक बुक में बैंक अकाउंट नंबर लिखा होता है। क्योंकि किसी भी तरह के रिकॉर्ड के लिए चेक नंबर को ही देखा जाता है। चेक के लेन-देन में सबसे जरूरी चेक नंबर ही होती है।

वहीं, एक ट्रांजेक्शन आईडी भी होती है जो चेक के नीचे लिखे नंबरों में अंतिम दो अंक होते हैं। चेक के नीचे विशेष ट्रांजैक्शन कोड भी लिखा होता है, जो यह दर्शाता है कि चेक किस प्रकार का है, जैसे कि बचत खाता, चालू खाता, आदि। उदाहरणतया, यदि आईसीआईसीआई बैंक का कोड 229 और एचडीएफसी बैंक का कोड 240 होता है, तो अन्य जानकारी 29, 30 और 31 नंबर एट पार चेक को दर्शाते हैं, जबकि 09, 10 और 11 लोकल चेक को दर्शाते हैं।

इससे साफ है कि चेक पर लिखे नंबरों में बैंकिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज़ छिपे होते हैं, जिसमें MICR सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसका मतलब मैग्नेटिक इंककैरक्टर रिकॉग्निशन होता है। इस नंबर को चेक रीडिंग मशीन पढ़ती है। इससे उस बैंक के खाताधारक के ब्रांच के बारे में जानकारी जुटाने में मदद मिलती है जिससे चेक को इश्यू किया जाता है। 

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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