Prabhasakshi Exclusive: Russia-Ukraine के बीच चल रहा युद्ध Robot War में बदला, बम-बारूद नहीं अब तकनीक का हो रहा उपयोग

By नीरज कुमार दुबे | Jul 04, 2024

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) जी से जानना चाहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे। खबरें हैं कि अब यूक्रेन एआई की मदद लेकर रूस को नुकसान पहुँचाने का प्रयास करेगा, इसे कैसे देखते हैं आप? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस समय कई यूक्रेनी कंपनियां एआई के माध्यम से अपनी सेना की मदद कर रही हैं ताकि रूस को परास्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर दुश्मन को मात देने का दबाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि बहुत से देश अब मदद देते देते थक गये हैं। उन्होंने कहा कि इस समय यूक्रेन तकनीकी हथियारों की सिलिकॉन वैली बन चुका है। उन्होंने कहा कि यहां कंपनियां ऐसी तकनीक ला रही हैं जो मानव की सोच के मुताबिक लक्ष्य पर सटीक निशाना साधती है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि कीव में लंबी दूरी के ड्रोन बनाये जा रहे हैं जो स्वचालित सिस्टम का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि यह ड्रोन वास्तविक समय के वीडियो भेजता है। उन्होंने कहा कि आज ऐसी स्थिति उभर रही है कि तकनीक के माध्यम से ड्रोनों का झुंड स्वतः ही दुश्मन पर एक साथ हमला बोल सकता है और वह दिन भी दूर नहीं है जब कंप्यूटर विज़न वाली मशीन गन स्वचालित रूप से सैनिकों को मार गिराएंगी। उन्होंने कहा कि ये तकनीक रूस के खिलाफ़ यूक्रेन को बढ़त प्रदान कर सकती है पर मानवाधिकार समूह और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी इस डर से इसके उपयोग को सीमित करना चाहते हैं क्योंकि इससे हथियारों की एक ऐसी नई दौड़ शुरू हो सकती है जोकि किसी के नियंत्रण में नहीं रहेगी।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जैसे-जैसे रूस के खिलाफ युद्ध लंबा खिंच रहा है, यूक्रेन अत्याधुनिक युद्ध के लिए एक परीक्षण स्थल के रूप में उभर रहा है, जिसमें ड्रोन और अन्य वाहन शामिल हैं जो अपने मिशन के कुछ हिस्सों को अपने दम पर पूरा करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि एआई-संचालित ड्रोन कुछ ही सेकंड में वह कर सकते हैं जो एक इंसान को कई घंटों में करना होगा। उन्होंने कहा कि वैसे भी फरवरी 2022 में रूसी टैंकों के यूक्रेनी सीमाओं पर आने के समय से ही प्रौद्योगिकी यूक्रेन की लड़ाई की धुरी रही है। उन्होंने कहा कि वैसे यूक्रेन के साधारण ड्रोनों को रोकने के लए रूस ने भी पूरा इंतजाम कर रखा है। उन्होंने कहा कि रूस में फ्रंट लाइन पर हर 10 किलोमीटर पर जैमिंग स्टेशन हैं, इसलिए यूक्रेन को एआई की मदद लेने पर मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि रूस पर बढ़त बनाने की कोशिश में लगे यूक्रेन ने स्थानीय और पश्चिमी कंपनियों के साथ मिलकर जवाबी उपाय विकसित करने और उनका परीक्षण करने तथा उन्हें युद्ध के मैदान में उतारने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया है।

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