भारत के लिये खतरा है पाक-बांग्लादेश की नजदीकियां

By ललित गर्ग | Jan 16, 2025

बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार प्रधानमंत्री शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद से लगातार भारत विरोधी गतिविधियों एवं कारगुजारियों एवं षडयंत्रों में संलग्न है, लगता है पाकिस्तान के शह पर बांग्लादेश का भारत विरोधी रवैया बढ़ रहा है। बांग्लादेश में लगातार भारत विरोधी मुहिम व अल्पसंख्यक हिन्दुओं एवं हिन्दू धर्मस्थलों पर हिंसक हमलों के बाद अब भारत सीमा पर बाड़बंदी को लेकर बेवजह का विवाद खड़ा किया जा रहा है। जबकि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच पहले ही सहमति बनने के बाद बड़े हिस्से पर बाड़बंदी हो चुकी है। लेकिन टकराव मोल लेने को तैयार बैठे बांग्लादेश के हुक्मरान विवाद के नये-नये मुद्दे तलाश रहे हैं एवं दोनों देशों की आपसी संबंधों को नेस्तनाबूंद कर रहे हैं। बांग्लादेश भारत की शांति व सद्भाव की कामना एवं सहनशीलता को उसकी कमजोरी न माने, ऐसी भूल बांग्लादेश के लिये बहुत भारी पड़ सकती है। दोनों देशों की शांति, सद्भावना एवं सौहार्द के लिये किसी तीसरे देश के दखल को बढ़ने न दिया जाये।

इसे भी पढ़ें: ट्रंप का 'ग्रेटर अमेरिका' प्लान, USSR के अतीत के पन्नों को जोड़ते पुतिन, खुद को अखंड बनाने की कोशिश में लगी दुनिया के बीच भारत कहां खड़ा

बड़ी सच्चाई है कि पाक का जन्म ही भारत विरोधी मानसिकता से हुआ है। ऐसे में अतीत से सबक लेते हुए भारत को अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चूक नहीं करनी चाहिए। किसी भी तरह की ढिलाई भारतीय सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है। भारत की उदारता को बांग्लादेश हमारी कमजोरी न मान ले, इसलिए उसे बताना जरूरी है कि भारत से टकराव की कीमत उसे भविष्य में चुकानी पड़ सकती है। यह भी कि संबंधों में यह कसैलापन, दौगलापन एवं टकराव लंबे समय तक नहीं चल सकता। उसकी यह कटुता उसके लिये ही कालांतर घातकएवं विनाशकारी साबित हो सकती है। यह विडंबना ही है कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस से क्षेत्र में शांति व सद्भाव की जो उम्मीदें थी, उसमें उन्होंने मुस्लिम कट्टरपंथ को आगे करके निराश ही किया है। उनकी सरकार लगातार विघटनकारी, अड़ियल व बदमिजाजी का रुख अपनाए हुए है, दोनों देशों के संबंध बिगाड़ने में पर्दे के पीछे पाकिस्तान की भूमिका को साफ-साफ देख जा रहा है। जबकि शेख हसीना शासनकाल में भारत और बांग्लादेश के संबंध सामान्य थे तो भारत बांग्लादेश को विश्वास में लेकर बाड़बंदी कर रहा था लेकिन अब यूनुस सरकार लगातार उकसाने वाली कार्रवाई कर रही है। उसने पाकिस्तानियों का बांग्लादेश में प्रवेश आसान कर दिया है तो पाक के बांग्लादेश को भारत विरोधी प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी के चलते बांग्लादेश की भारत विरोधी बयानबाजी और कारगुजारी से दोनों देशों के संबंधों में जबरदस्त कड़वाहट आ चुकी है। बावजूद इसके गत दिसम्बर में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपनी ढाका यात्रा के दौरान बांग्लादेश को आश्वस्त किया था कि भारत उसका दोस्त बना हुआ है और व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के मामलों में रिश्ते पहले की तरह बरकरार रहेंगे। उस समय ऐसा लगा था कि दोनों पक्षों ने सीमा पर स्थिति को शांत कर लिया है। 

यूनुस सरकार ने भारत विरोधी तत्वों को न केवल हवा दी है बल्कि उनको उग्र कर दिया है। जेल में बंद कई भारत विरोधी तत्वों को बेल दे दी गयी है, ये ही तत्व भारत में अस्थिरता फैलाने की साजिश रच रहे हैं। लिहाजा भारत के लिये बॉर्डर पर घेराबंदी अत्यावश्यक हो गयी है। राजनीतिक आग्रह, पूर्वाग्रह एवं दुराग्रह के चलते यूनुस सरकार शेख हसीना के पिता की विरासत को निपटाने एवं धुंधलाने की कोशिशों में लगी हुई है। कट्टरपंथी तत्व जनाक्रोश के चलते अपनी सुविधा का मुहावरा गड़ने का प्रयास कर रहे हैं। भारत में पहले से ही लाखों बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं लेकिन ढाका द्वारा आतंकवादियों और दोषी ठहराए गए इस्लामी कट्टरपंथियों की रिहाई के बाद भारत द्वारा बॉर्डर पर कंटीले तारों को लगाने की कोशिश का बांग्लादेश सरकार द्वारा कड़ा विरोध दर्शा रहा है कि पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश भी भारत में अस्थिरता, अशांति एवं अराजकता फैलाना चाहता है। 

बांग्लादेश बाड़ लगाने के समझौते का सम्मान करने के बजाय उसकी समीक्षा करने की बात करके उसमें रौड़ा अटकाना चाह रहा है। वह उन स्थानों पर कंटीले तारों वाली बाड़ लगाने का खास तौर पर विरोध कर रहा है, जहां से बड़े पैमाने पर घुसपैठ और तस्करी होती है और यही से आतंकवादी गतिविधियों को संचालित करने की संभावनाएं हैं। इसके कुछ पुष्ट प्रमाण भी मिले है। इस संदर्भ में बांग्लादेश वैसे ही कुतर्क एवं बेतूके तथ्य प्रस्तुत कर रहा है, जैसे सीमा सुरक्षा के भारत के प्रयत्नों पर पाकिस्तान करता रहता है। हैरानी नहीं कि यह बांग्लादेश से पाकिस्तान की हालिया नजदीकी किसी बड़ी दुर्घटना या आतंकी हमले का सबब बन जाये। भारत इसकी अनदेखी नहीं कर सकता। भारत को यह देखना होगा कि कहीं ये दोनों देश मिलकर उसके खिलाफ कोई ताना-बाना तो नहीं बुन रहे हैं? निश्चित रूप से पिछले दिनों बांग्लादेश से रिश्तों में जिस तरह से अविश्वास एवं कडवाहट उपजी है, उसके चलते भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता। भारत के लिए यही उचित है कि वह पाक-बांग्लादेश के संभावित गठजोड़ से सावधान रहे। भारत को अपनी सुरक्षा चिंताओं के लिये कदम उठाने ही चाहिए। बीएसएफ और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश यानी बीजीबी में कई बार बातचीत के बाद बाड़बंदी मुद्दे पर सहमति बन चुकी है। लेकिन बांग्लादेश भारत की सदाशयता एवं उदारता के बावजूद टकराव के मूड में नजर आता है। ऐसा ही रवैया उसका अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी रहा है, जिस बारे में वह अब दलील दे रहा है कि हालिया बांग्लादेश में हिन्दुओं से जुड़ी हिंसक घटनाएं सांप्रदायिक नहीं बल्कि राजनीतिक कारणों से हुई हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि दोनों देशों के संबंध बिगाड़ने में पर्दे के पीछे पाकिस्तान की भूमिका हो। जिस बांग्लादेश को पाकिस्तानी क्रूरता से मुक्त कराकर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत ने तमाम कुर्बानियों के बाद जन्म दिया, उसका यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं, बल्कि विडम्बनापूर्ण कहा जाएगा।

- ललित गर्ग

लेखक, पत्रकार, स्तंभकार

प्रमुख खबरें

पागलों के हाथ में नहीं दे सकते एटम बम... ट्रंप बोले- अभी और लंबा चलेगा ईरान युद्ध

Lucknow के KGMU का Video दिखाकर भड़के Akhilesh Yadav, कहा- यह AI नहीं, असली हकीकत है

West Bengal नतीजों से पहले TMC का सुप्रीम दांव फेल, Election Commission के सर्कुलर पर लगी मुहर

Smartphone की ये Secret Setting है कमाल! बिना बटन दबाए Screen Lock करें, जानें ये Smart Trick