By रेनू तिवारी | Jan 16, 2026
पंजाब की राजनीति में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान पंजाब केसरी अखबार समूह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। समूह का दावा है कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ निष्पक्ष खबरें प्रकाशित करने के कारण उसे सरकारी एजेंसियों के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है। पंजाब केसरी समूह के विजय कुमार चोपड़ा, अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा हाल ही में की गई छापेमारी की श्रृंखला "प्रेस को डराने" के उद्देश्य से की गई है। समूह के अनुसार, यह उत्पीड़न तब शुरू हुआ जब अखबार ने 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक के खिलाफ विपक्ष के आरोपों पर एक संतुलित और निष्पक्ष रिपोर्ट प्रकाशित की। पत्र में मुख्यमंत्री मान से अपील की गई है कि वे इस मामले की तत्काल जांच करें और मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करें।
पंजाब सरकार ने देर शाम एक आधिकारिक बयान जारी कर पंजाब केसरी समूह के आरोपों को साफ तौर पर खारिज कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) सहित विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह राज्य की सत्ता की ताकत का इस्तेमाल कर मीडिया की आवाज दबा रही है। भाजपा ने कहा कि उसका एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात करेगा और यह मुद्दा उनके सामने उठाएगा।
विजय कुमार चोपड़ा, अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा द्वारा हस्ताक्षरित पत्र के प्रारंभ में कहा गया, ‘‘हम हाल के कुछ घटनाक्रमों के संबंध में अपनी गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त करने के लिए लिख रहे हैं, जिनसे यह गंभीर आशंका उत्पन्न होती है कि पंजाब सरकार प्रेस को डराने के लिए किसी बाहरी मकसद से पंजाब केसरी समूह और उसके सहयोगियों को विशेष रूप से निशाना बना रही है।’’ मान से अनुरोध किया गया है कि वह ‘‘इस मामले की तत्काल जांच करें और जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करें।’’
पत्र में दावा किया गया है कि घटनाक्रम की शुरुआत 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित एक समाचार से हुई, ‘‘जो पंजाब में सत्तारूढ़ दल के राष्ट्रीय संयोजक के संबंध में विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर एक बहुत ही संतुलित और निष्पक्ष रिपोर्ट थी।’’ इसके बाद, पत्र में कहा गया है कि दो नवंबर 2025 से पंजाब सरकार ने पंजाब केसरी समूह को दिए जाने वाले सभी विज्ञापनों पर रोक लगा दी है, जो पंजाब में सबसे अधिक प्रसार संख्या वाले हिंदी और पंजाबी दैनिकों का प्रकाशन करता है। इसमें कहा गया है, “प्रेस पर आर्थिक दबाव के बावजूद, हम दृढ़ रहे और अपनी स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्टिंग जारी रखी। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में पंजाब केसरी और उसके प्रर्वतकों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया गया है।’’
समूह ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में चोपड़ा परिवार, पंजाब केसरी समूह के प्रवर्तकों और अन्य के खिलाफ कई कार्रवाइयां की गई हैं। पत्र में 11 जनवरी को, जालंधर में चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित एक होटल - पार्क प्लाजा जालंधर में एफएसएसएआई द्वारा छापा, चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जालंधर में संचालित होटल पर 12 जनवरी को जीएसटी विभाग द्वारा की गई छापेमारी, 12 जनवरी को आबकारी विभाग द्वारा चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जालंधर में संचालित होटल में की गई छापेमारी का जिक्र किया गया है। इसमें दावा किया गया कि 12 जनवरी को कारखाना विभाग के उप निदेशक द्वारा लुधियाना स्थित पंजाब केसरी प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा गया था।
पत्र में कहा गया है कि 12 जनवरी 2026 को कारखाना विभाग के उप निदेशक द्वारा पंजाब केसरी प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा गया। 13 जनवरी को, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जालंधर में चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित होटल में छापा मारा। पत्र में जालंधर जोन के कलेक्टर-सह-आबकारी अधिकारी द्वारा 13 जनवरी को जारी किए गए आबकारी विभाग के कारण बताओ नोटिस और 14 जनवरी को लाइसेंस रद्द करने के आदेश का भी जिक्र किया गया है।
इसके अलावा, इसमें जालंधर के एक होटल में 14 जनवरी को बिजली कनेक्शन काटे जाने का भी उल्लेख है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि 15 जनवरी को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लुधियाना और जालंधर स्थित प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा गया और कार्रवाई की गई। इसमें दावा किया गया, इन कार्रवाइयों के कारण आशंका है कि 15 जनवरी से जालंधर, लुधियाना और बठिंडा स्थित विभिन्न प्रेस में कामकाज बाधित या पूरी तरह बंद हो जाएगा।
सुरानुस्सी, जालंधर, फोकल प्वाइंट, लुधियाना और आईजीसी बठिंडा स्थित प्रेस के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पत्र के माध्यम से समूह ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि जैसा कि उन्हें ज्ञात होगा, दिवंगत लाला जगत नारायण ने 1949 में हिंद समाचार की स्थापना की थी और पंजाब केसरी का प्रकाशन 1965 में शुरू हुआ था।
पंजाब केसरी समूह ने कहा, ‘‘प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सर्वविदित है, क्योंकि पंजाब में उग्रवाद/आतंकवाद के दिनों में निडर रिपोर्टिंग के कारण हमारे पूज्य दिवंगत लाला जगत नारायण और दिवंगत रमेश चंद्र चोपड़ा तथा 60 अन्य कर्मचारी, एजेंट, हॉकर और पत्रकार शहीद हो गए और कई लोग घायल हुए। इसके बावजूद, समाचार पत्र ने किसी भी दबाव या प्रभाव के आगे झुके बिना निडरता से रिपोर्टिंग जारी रखी और आगे भी ऐसा ही करता रहेगा।’’
पत्र में कहा गया है, इस तरह की लक्षित कार्रवाई, जिसमें विभिन्न विभाग पूर्वनिर्धारित इरादे से हमारे कामकाज में बाधा डाल रहे हैं, स्पष्ट रूप से डराने-धमकाने के इरादे को दर्शाती है।’’ इसमें कहा, “हमें उम्मीद है कि आपका सम्मानित कार्यालय सरकार में किसी को भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को डराने-धमकाने की इजाज़त नहीं देगा।”
इसमें कहा गया है कि प्रेस की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने का प्रयास पंजाब में लोकतंत्र को गंभीर रूप से कमजोर करेगा, खासकर तब जब राज्य में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। अपने बयान में पंजाब सरकार ने “लक्षित हमले” के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यह दावा कई वैधानिक प्राधिकरणों द्वारा कानून के दायरे में रहकर उजागर किए गए गंभीर उल्लंघनों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
पंजाब सरकार ने कहा, ‘‘पंजाब केसरी समूह कुछ चुनिंदा निरीक्षणों और कार्रवाईयों का ही जिक्र कर डराने-धमकाने की कहानी गढ़ने की कोशिश कर रहा है, जबकि उन कार्रवाईयों के कारण, निष्कर्ष और नतीजे को जानबूझकर छिपाया जा रहा है जो सभी आधिकारिक जांच रिपोर्टों, वैधानिक नोटिसों और तर्कसंगत आदेशों में दर्ज हैं।’’ सरकार ने कहा, ‘‘इस पूरे मामले की शुरुआत न तो पत्रकारिता, न विज्ञापनों और न ही संपादकीय राय से हुई है। इसकी शुरुआत आधिकारिक रिकॉर्ड पर मौजूद ठोस सबूतों से हुई है।’’
पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि जालंधर के पार्क प्लाजा में की गई आबकारी कार्रवाई कोई सामान्य या नियमित निरीक्षण नहीं थी, बल्कि यह एक औपचारिक जांच के बाद की गई थी, जिसमें आबकारी कानून के कई गंभीर उल्लंघन सामने आए थे। सरकार ने कहा कि ये निष्कर्ष कारण बताओ नोटिस जारी करने, व्यक्तिगत सुनवाई, रिकॉर्ड की जांच और लाइसेंसधारक के कबूलनामे के बाद पारित लिखित आबकारी आदेश में दर्ज हैं।
पंजाब सरकार ने कहा कि नियमों का उल्लंघन केवल होटल संचालन तक सीमित नहीं था। श्रम एवं कारखाना विभाग द्वारा उसी समूह से जुड़ी कई प्रिंटिंग इकाइयों के निरीक्षण में श्रम कानूनों, सुरक्षा मानदंडों और वैधानिक रिकॉर्ड रखने संबंधी आवश्यकताओं का गंभीर और बार-बार उल्लंघन पाया गया। परेशान किए जाने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर श्रम, सुरक्षा और पर्यावरण कानूनों के पालन को दरकिनार नहीं किया जा सकता। सरकार ने ‘पूर्वनियोजित बदले की कार्रवाई’ के आरोप को भी खारिज कर दिया।
पंजाब सरकार ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक प्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि प्रेस की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई आबकारी, पर्यावरण या श्रम कानूनों से ऊपर हो जाए। सरकार ने कहा, “पंजाब में कानून सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। संपादकीय स्वतंत्रता की रक्षा की जाएगी, लेकिन जनस्वास्थ्य, श्रमिकों या पर्यावरण को खतरे में डालने वाले उल्लंघनों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।