By अजय कुमार | Nov 18, 2024
लखनऊ। 22 अक्टूबर को एनकाउंटर में घायल हुए लूट के आरोपित कमलेश तिवारी की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत के मामले में परिवारीजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिवार वालों का कहना है कि पैर में गोली लगने से घायल हुए कमलेश का सही समय पर ऑपरेशन न होने से उसके शरीर में इंफेक्शन फैल गया, जिससे उसकी मौत हुई है। सूत्रों के मुताबिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सेप्टीसीमिया की वजह से उसकी मौत होने की बात कही गई है।
कमलेश की पत्नी के मुताबिक रुपये के अभाव में उसके पति कमलेश का ऑपरेशन नहीं हो सका था। इससे उसके पैर के घाव में इंफेक्शन हो गया। आरोप है कि ऑपरेशन में देरी होने का कारण पूछने पर कमलेश की सुरक्षा में लगे जेल कर्मियों का कहना था कि जेल प्रशासन से इलाज का पैसा पास नहीं हुआ है। पीड़िता का कहना है ऑपरेशन में देरी की वजह से कमलेश के पैर के घाव में मवाद पड़ गया।हालत बिगड़ने पर आनन-फानन में 3 नवंबर को कमलेश का ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद पैर में लोहे की रॉड लगाने के लिए कमलेश को लिंब सेंटर में एडमिट करवाया गया। 14 नवंबर की देर रात कमलेश को खून की उल्टी होने लगी। हालत बिगड़ने पर उसे दोबारा ट्रॉमा सेंटर में रेफर कर दिया गया था।खून की उल्टी बंद न होने से कमलेश की हालत बिगड़ती चली गई। शुक्रवार सुबह सात बजे कमलेश की मौत हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सेप्टीसीमिया बीमारी की वजह से कमलेश की मौत होने की पुष्टि हुई। पत्नी रूमी ने बताया कि कमलेश ई-रिक्शा चलाता था। ससुर शिव कुमार तिवारी की डेढ़ वर्ष पूर्व सांस की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। बुजुर्ग सास घर में ही रहती है। आर्थिक तंगी की वजह से इकलौती बेटी खुशबू स्कूल नहीं जाती है। पीड़िता का कहना है कि कमलेश की मौत के बाद उनका पूरा परिवार उजड़ गया।
इस संबंध में कमलेश की मां फूलमती ने बताया कि 22 अक्टूबर की रात इलेक्ट्रॉनिक चौनल के जरिए उन्हें कमलेश को गोली मारने की सूचना मिली थी, जबकि पुलिसकर्मी पूछताछ करने का झांसा देकर कमलेश साथ ले गए थे। शुक्रवार को कमलेश की मौत होने पर पुलिस ने आनन-फानन में शव को पोस्टमॉर्टम करवाया। इधर पोस्टमॉर्टम हो रहा था, उधर पुलिस ने गुलाला घाट में शव को अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली। शव को घर लाने नहीं दिया। हिंदू रीति-रिवाज के विपरीत कमलेश के शव का अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद करवाया गया। 5 वर्षीय बेटी खुशबू ने पिता के शव को मुखाग्नि दी। मां फूलमती ने बताया कि घायल बेटे के हालचाल लेने वह ट्रॉमा सेंटर गई थीं। पीड़िता के मुताबिक कमलेश ने उन्हें बताया कि 22 अक्टूबर की रात उसे चार पहिया वाहन से उतारा गया, पुलिसकर्मियों ने उसके पैंट की जेब में चेन रखी। सामने पुलिस अधिकारी को देखते ही कमलेश ने जय हिंद किया, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने उसके पैर में गोली मार दी। फिर कमलेश को तमंचा दिया गया।
केजीएमयू लिंब सेंटर के आर्थोपेडिक सर्जन प्रफेसर नरेंद्र कुशवाहा का कहना है कि सेप्टीसीमिया होने पर मरीज का तुरंत ऑपरेशन करना चाहिए। ऑपरेशन में देरी होने पर इंफेक्शन शरीर के अंगों में फैल जाता है। इससे उसकी मौत हो सकती है। ऐसे मरीजों को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। लखनऊ जिला जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह ने कहा कि जेल प्रशासन की तरफ से कमलेश का समय पर इलाज करवाया गया था। 8 से 11 नवंबर के बीच चिकित्सकों के कहने पर 36 हजार से अधिक रुपये की दवाइयां खरीदी गई थीं।