By मृत्युंजय दीक्षित | May 14, 2026
पश्चिम बंगाल में 69 वर्षों के अथक संघर्ष के बाद भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार प्रथम सरकार शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में कार्यभार ग्रहण करके काम पर लग गयी है। बंगाल में बीजेपी की विजय बहुत बड़ी व ऐतिहासिक है। बंगाल ही नहीं भारत के अन्य भागों में भी इस विजय का आनंद दिखाई वातावरण दे रहा है। इस विजय के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्नाटक, तेलंगना और गुजरात के दौरे में जो भीड़ उमड़ रही है उससे स्पष्ट रूप से जनसामान्य और भाजपा कायकर्ताओं के उत्साह का अनुमान लगाया जा सकता है। बंगाल विधानसभा चुनावों मे हिंदू समाज ने पहली बार बांग्लादेशी घुसपैठ और मुस्लिम तुष्टिकरण की विकृत राजनीति के विरुद्ध एकजुट होकर मतदान किया और जिसका परिणाम आज पूरा भारत देख रहा है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से आज तक बंगाल में कांग्रेस, वामपंथ और तृणमूल की सरकारें रहीं जो तुष्टिकरण में आकंठ डूबी रहीं और हिंदुओ को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया। स्थितियां इतनी विकट हो गयी थीं कि बंगाल की धरती पर जय श्रीराम बोलने पर नफरत का कहर टूट पड़ता था। आज उसी बंगाल में जब जयश्रीराम के नारे गूंज रहे हैं तो बंगाल का हर सनातनी खुशी से सराबोर हो रहा है। बंगाल में भाजपा सरकार आने से पश्चिम बंगाल के हिन्दुओं को तुष्टिकरण की दमनकारी नीतियों और भय के माहौल से आजादी मिली है। यह विजय केवल सत्ता का परिवर्तन नही अपितु बंगाल के पुनरुत्थान का शंखनाद है। अब बंगाल सही मायने में सोनार बांग्ला बनने की ओर अग्रसर होगा। भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व आर्थिक उत्थान के नए दौर मे प्रवेश करेगा।
हार की कुंठा से ग्रसित तृणमूल व विरोधी दलों के नेता अभी भी एसआईआर, चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षाबलों वाले आरोप दोहरा रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि भाजपा ने यह चुनाव लम्बे संघर्ष और अपने कार्यकर्ताओं के बलिदान के बाद जीता है। तृणमूल के राज में वर्ष 2011 से 2025 के बीच भाजपा के 321 कार्यकर्ता मारे गए, उनके विरुद्ध हुई हिंसा में हजारों घर उजाड़ दी गए, भाजपा व संघ के किसी कार्यकर्ता को बम से उड़ाया गया किसी को पेड़ से लटकाया गया। 2021 में तो भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रति तृणमूल के लोगों ने क्रूरता की सभी सीमाएं लांघ दी थीं। नंदीग्राम से लेकर वीरभूम तक, कूच बिहार हो या वशीर हाट चुनाव के बाद बदले के नाम पर पूरे-पूरे गांव खाली करवा दिए गए थे। 2021 की चुनावी हिंसा में हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए किंतु ममता सरकार उन सभी में अड़ंगा डालती रही। आज संदेशखाली से आर जी कर कांड तक सभी पीड़ित परिवारों के मन में एक नया सबेरा आया है कि अब न्याय होकर रहेगा। बंगाल के हिंदू जनमानस को नयी सरकार पर भरोसा है इसलिए नई सरकार को भी अत्यंत तत्परता और सतर्कता के साथ संकल्प पत्र को पूरा करना होगा। नई सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट की पहली बैठक में जो निर्णय लिए हैं उनसे उसकी गंभीरता तथा बंगाल की जनता के प्रति प्रतिबद्धता का पता चलता है।
नई सरकार के पहले फैसले- शुभेंदु मंत्रिपरिषद ने अपनी पहली बैठक में ही कई बड़े निर्णय लिए हैं। जिनमें आयुष्मान भारत योजना को बंगाल में लागू करना, भारतीय न्याय सहिंता के तीन कानूनों को लागू करना, बीएसएफ को सीमावर्ती क्षेत्रों में 45 दिनों के अन्दर जमीन स्थानांतरित करना शामिल है। ममता बनर्जी की सरकार इन सभी कार्यों में लगातार अड़ंगा ही डालती रही थी।
- मृत्युंजय दीक्षित