विश्व में भारत की पहली सांस्कृतिक प्रतिनिधि थीं मैडम भीकाजी कामा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 24, 2018

भारत के आदि ध्वज को पहली बार वैश्विक मंच पर रखकर दुनिया को सम्भावित स्वतंत्र और स्वायत्त देश के रूप में भारत की दस्तक का अहसास कराने वाली मैडम भीकाजी कामा साहस, निर्भीकता और मजबूत इरादों की प्रतीक थीं। विदेश में भारत की पहली सांस्कृतिक प्रतिनिधि कही जाने वाली कामा ने स्वराज का नारा बुलंद किया। उन्होंने महिलाओं के हक के लिए भी आवाज उठाई। उनके मुखर और अहिंसक क्रांति से घबराए अंग्रेजों ने भारत में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। भीकाजी कामा के जीवन से जुड़े तथ्यों के मुताबिक उन्होंने अपना जीवन भारत की आजादी के लिए न्यौछावर कर दिया। 

भीकाजी कामा ने 22 अगस्त 1907 को जर्मनी में हुई इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांफ्रेंस में भारतीय स्वतंत्रता के ध्वज को बुलंद किया था। उस सम्मेलन में उन्होंने भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त करने की अपील की थी। उनके तैयार किए गए झंडे से काफी मिलते−जुलते डिजायन को बाद में भारत के ध्वज के रूप में अपनाया गया। 

भीकाजी द्वारा लहराए गए झंडे में देश के विभिन्न धर्मों की भावनाओं और संस्कृति को समेटने की कोशिश की गई थी। उसमें इस्लाम, हिंदुत्व और बौद्ध मत को प्रदर्शित करने के लिए हरा, पीला और लाल रंग इस्तेमाल किया गया था। साथ ही उसमें बीच में देवनागरी लिपि में वंदे मातरम लिखा हुआ था। जर्मनी में फहराया गया वह झंडा इस वक्त पुणे की मराठा एवं केसरी लाइब्रेरी में रखा हुआ है। तथ्यों के मुताबिक भीकाजी हालांकि अहिंसा में विश्वास रखती थीं लेकिन उन्होंने अन्यायपूर्ण हिंसा के विरोध का आह्वान भी किया था। उन्होंने स्वराज के लिए आवाज उठाई और नारा दिया− आगे बढ़ो, हम भारत के लिए हैं और भारत भारतीयों के लिए है।

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