'मजदूरों-किसानों की आवाज़ नज़रअंदाज़ हुई', Rahul Gandhi का केंद्र पर हमला, 'श्रम संहिताओं' और 'व्यापार समझौतों' पर उठाए सवाल

By रेनू तिवारी | Feb 12, 2026

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नई श्रम संहिताओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के कारण देश के मजदूरों और किसानों का भविष्य अंधकार में है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या वे जनता की आवाज़ सुनेंगे या उन पर किसी बाहरी "ग्रिप" (पकड़) का प्रभाव बहुत मजबूत है।

उनके मुताबिक, किसानों को आशंका है कि (अमेरिका के साथ किया गया) व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है। जब उनके (मजदूरों और किसानों के) भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, तब उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।’’

उन्होंने सवाल किया कि क्या मोदी जी अब सुनेंगे या उन पर किसी “ग्रिप” की पकड़ बहुत मज़बूत है? राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं।

क्या हैं ये चार श्रम संहिताएं?

केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई संहिताएं तैयार की हैं, जिन्हें लेकर विपक्ष और ट्रेड यूनियन विरोध कर रहे हैं:

वेतन संहिता (Cods on Wages)

औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)

सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code)

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता (OSH Code)

सरकार का तर्क है कि ये सुधार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देंगे, जबकि विपक्ष इसे पूंजीपतियों के पक्ष में और मजदूरों के शोषण का औजार बता रहा है। 

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