By Ankit Jaiswal | Feb 08, 2026
वॉशिंगटन पोस्ट के पब्लिशर और सीईओ विल लुईस ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला अख़बार में हुए ऐतिहासिक पुनर्गठन और बड़े पैमाने पर छंटनी के ठीक तीन दिन बाद सामने आया।
मौजूद जानकारी के अनुसार लुईस ने कर्मचारियों को भेजे गए दो पैराग्राफ के ईमेल में कहा कि दो वर्षों के परिवर्तन के बाद अब उनके लिए पद छोड़ने का यही सही समय है। उनके इस्तीफे के बाद अख़बार के मुख्य वित्त अधिकारी जेफ डी’ओनोफ्रियो को अस्थायी पब्लिशर नियुक्त किया गया।
गौरतलब है कि इस सप्ताह वॉशिंगटन पोस्ट ने लागत घटाने के लिए कड़े कदम उठाए थे। इसके तहत दुनिया भर में 300 से अधिक पत्रकारों की छंटनी की गई, खेल और पुस्तक जैसे कई सेक्शन बंद कर दिए गए और एशिया तथा मध्य पूर्व में मौजूद कई ब्यूरो समेट दिए गए। यह फैसला ऐसे दौर में आया है, जब अख़बार लंबे समय से सब्सक्राइबर गिरावट और वरिष्ठ पत्रकारों के इस्तीफों से जूझ रहा था।
विल लुईस ने जनवरी 2024 में पब्लिशर के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह द वॉल स्ट्रीट जर्नल में शीर्ष पद पर रह चुके थे। हालांकि उनका कार्यकाल शुरू से ही विवादों और अस्थिरता से भरा रहा है। न्यूजरूम में बार-बार छंटनी, असफल पुनर्गठन योजना और पूर्व कार्यकारी संपादक सैली बुज़बी के जाने ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया था।
लुईस द्वारा चुने गए नए कार्यकारी संपादक रॉबर्ट विनेट ने भी नैतिक सवाल उठने के बाद खुद को दौड़ से अलग कर लिया था। यह विवाद ब्रिटेन में काम के दौरान जानकारी के बदले भुगतान जैसे तरीकों से जुड़ा था, जिसे अमेरिकी पत्रकारिता में अनैतिक माना जाता है। इसके बाद मैट मरे को कार्यकारी संपादक की जिम्मेदारी सौंपी गई।
अंदरखाने लुईस की आलोचना उनके तीखे बयानों को लेकर भी हुई। एक बैठक में उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि बदलाव जरूरी हैं क्योंकि उनके काम को पर्याप्त पाठक नहीं मिल रहे। इस टिप्पणी को कई कर्मचारियों ने अपमानजनक और मनोबल गिराने वाला बताया था।
वॉशिंगटन पोस्ट गिल्ड ने उनके इस्तीफे का स्वागत करते हुए इसे काफी देर से उठाया गया कदम बताया। यूनियन ने कहा कि उनका कार्यकाल एक प्रतिष्ठित अमेरिकी मीडिया संस्थान को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर याद रखा जाएगा और अब मालिक जेफ बेजोस को अख़बार के भविष्य में निवेश पर फैसला लेना चाहिए।
इस छंटनी में कई चर्चित नाम भी शामिल रहे हैं। विदेशी मामलों पर लिखने वाले कॉलमिस्ट ईशान थरूर और दिल्ली ब्यूरो प्रमुख प्रशांत वर्मा भी प्रभावित हुए हैं। मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर कटौती से अख़बार की वैश्विक मौजूदगी और संपादकीय ताकत को गहरा झटका लग सकता है।