RBI Policy से पहले Rupee पर चौतरफा दबाव, जानें Dollar के मुकाबले क्यों हो रहा है कमजोर।

By Ankit Jaiswal | Jun 04, 2026

भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को हल्की कमजोरी देखने को मिली, जहां रुपया लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले नीचे बंद हुआ। बाजार में कारोबार अपेक्षाकृत सीमित दायरे में रहा, लेकिन निवेशकों और कारोबारियों की निगाहें अब शुक्रवार को आने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिकी हुई हैं।

बता दें कि मई महीने के मध्य में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 तक पहुंच गया था। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने हाजिर और अग्रिम मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभालने की कोशिश की। केंद्रीय बैंक के इस कदम से रुपये को कुछ राहत मिली और उसमें सुधार देखने को मिला है।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप का असर केवल एक्सचेंज दर पर ही नहीं बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य संकेतकों पर भी पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एडवांस एक्सचेंज प्रीमियम में कमी आई है, जिससे आयातकों के लिए भविष्य के डॉलर भुगतान को सुरक्षित करना अपेक्षाकृत सस्ता हो गया है। हालांकि इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि निर्यातकों के लिए अग्रिम सुरक्षा लेने की प्रेरणा कम हो सकती है।

मौजूद जानकारी के अनुसार बाजार में यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि सरकार और केंद्रीय बैंक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कुछ अतिरिक्त कदम उठा सकते हैं। खबरों के मुताबिक सरकारी बांड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ कर में राहत देने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा अनिवासी भारतीय जमा योजनाओं को अधिक आकर्षक बनाने और विदेशी ऋण जुटाने वाली कंपनियों के लिए हेजिंग लागत कम करने जैसे उपायों की भी चर्चा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुक्रवार को रिजर्व बैंक की नीति समीक्षा में रुपये को समर्थन देने वाले किसी ठोस कदम की घोषणा नहीं होती है, तो भारतीय मुद्रा पर फिर से दबाव बढ़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब हाल के दिनों में रुपये में कुछ सुधार आया है और बाजार पहले से ही सकारात्मक संकेतों की उम्मीद कर रहा है।

बता दें कि ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में अलग-अलग राय बनी हुई है। अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि मुद्रा कारोबारियों का एक वर्ग यह भी मानता है कि केंद्रीय बैंक महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए दरों में वृद्धि पर विचार कर सकता है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों का माहौल भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बनाया है। दूसरी ओर तनाव कम होने को लेकर मिले मिश्रित संकेतों ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है। इसका असर एशियाई शेयर बाजारों और क्षेत्रीय मुद्राओं पर भी दिखाई दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक रिजर्व बैंक के फैसलों, विदेशी निवेश प्रवाह और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल बना हुआ है और सभी की नजर शुक्रवार की नीति समीक्षा पर टिकी हुई हैं।

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