Prabhasakshi NewsRoom: हिंसक आपराधिक गतिविधियों में India की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं, Mark Carney की भारत यात्रा से पहले Canada का बड़ा बयान

By नीरज कुमार दुबे | Feb 26, 2026

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा कार्नी की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के संबंध हाल के वर्षों के तनाव के बाद सामान्यीकरण और नई दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। इस यात्रा को सामरिक और आर्थिक पुनर्संतुलन के रूप में भी देखा जा रहा है।

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कनाडा की सरकार इस यात्रा को एशिया में अपने आर्थिक विस्तार और व्यापार विविधीकरण की व्यापक रणनीति का हिस्सा मान रही है। विशेषकर ऐसे समय में जब अमेरिका की नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच ओटावा नए साझेदारों की तलाश में है, भारत एक स्वाभाविक और विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभरा है।

नई दिल्ली में शिखर वार्ता

1 मार्च को कार्नी नई दिल्ली पहुंचेंगे और 2 मार्च को हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। दोनों नेता जून 2025 में कनाडा के कननास्किस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन और नवंबर 2025 में जोहानिसबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई अपनी पिछली मुलाकातों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

वार्ता में व्यापार और निवेश, ऊर्जा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा जन से जन संपर्क जैसे क्षेत्रों पर चर्चा होगी। इसके अलावा दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार विमर्श करेंगे। दिन में बाद में दोनों प्रधानमंत्री भारत कनाडा मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंच में भी भाग लेंगे, जो निजी क्षेत्र को नीति सहयोग से जोड़ने का मंच बनेगा।

तनाव से सामान्यीकरण तक

हम आपको याद दिला दें कि भारत और कनाडा के संबंध 2023 में कनाडा में एक अलगाववादी की हत्या के बाद गंभीर संकट में आ गए थे। उस समय कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में आरोप लगाया था कि हत्या के मामले में भारतीय एजेंसियों की संभावित संलिप्तता की जांच की जा रही है। इसके बाद दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया और संबंधों में तीखा तनाव पैदा हो गया था।

भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया था। 2025 में कार्नी के पदभार संभालने के बाद संबंधों में धीरे धीरे सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद, हाल ही में कनाडाई संघीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह आकलन साझा किया है कि कनाडा की धरती पर हिंसक आपराधिक गतिविधियों में भारत की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं है। दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच नियमित संवाद और मजबूत राजनयिक संपर्क को इस सकारात्मक बदलाव का आधार बताया गया है। यह परिवर्तन भारत की उस स्थिर और सुसंगत नीति का समर्थन करता है जिसमें उसने निरंतर अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया था। अब दोनों देश कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति और सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

कार्नी की यात्रा का सामरिक महत्व

कनाडा के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा का सामरिक महत्व भी है। आर्थिक दृष्टि से भारत विश्व की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में है जबकि कनाडा ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और कृषि संसाधनों में समृद्ध है। दोनों की पूरक अर्थव्यवस्थाएं व्यापक सहयोग की संभावनाएं खोलती हैं। इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका को देखते हुए यह साझेदारी रणनीतिक गहराई रखती है।

इसके अलावा, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त दे सकता है। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में पहले से मजबूत जन संपर्क इस सहयोग को आधार प्रदान करते हैं।

साथ ही हिंद प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत और कनाडा का संवाद लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम आधारित व्यवस्था के समर्थन को सुदृढ़ कर सकता है। रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा भविष्य में नई संभावनाएं खोल सकती है।

इसके अलावा, प्रवासी भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच सेतु का कार्य करता है। हालांकि इस बार कार्नी की यात्रा में पंजाब का दौरा शामिल नहीं है, जिसे पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्रियों ने परंपरागत रूप से किया था, परंतु ओटावा ने इस दौरे को स्पष्ट रूप से व्यापार केंद्रित बताया है और सांस्कृतिक संपर्क को कनाडा में आगे बढ़ाने की बात कही है।

आगे की राह

कार्नी की यह यात्रा भारत कनाडा संबंधों में सकारात्मक गति को पुनर्स्थापित करने और आगे बढ़ाने का अवसर है। यदि प्रस्तावित सहयोग क्षेत्रों में ठोस प्रगति होती है और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत आगे बढ़ती है, तो यह संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है। कुल मिलाकर, यह दौरा केवल एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं बल्कि दो लोकतांत्रिक देशों के बीच विश्वास बहाली, सामरिक संतुलन और साझा समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले दिनों में हैदराबाद हाउस की वार्ता इस नई दिशा को औपचारिक रूप दे सकती है।

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