By अंकित सिंह | May 05, 2025
प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने पहलगाम आतंकी हमला और उसको लेकर हो रही राजनीति तथा जातिगत जनगणना के मुद्दे पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज दुबे ने कहा कि भारत की ओर से कार्रवाई शुरू हो चुकी है और हम कह सकते हैं कि युद्ध भी अब शुरू हो चुका है। फिलहाल भारत-पाकिस्तान की आर्थिक और कूटनीतिक तौर पर कमर तोड़ने की कोशिश कर रहा है। नीरज दुबे ने कहा कि जब से भारत ने यह निर्णय लिया कि सिंधु जल समझौता को स्थगित किया जाएगा तब से पाकिस्तान यह कह रहा है कि यह युद्ध की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अभी तो फिलहाल कूटनीतिक और आर्थिक तौर पर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन आगे यह सैन्य कार्रवाई में भी तब्दील हो सकता है, इस पर नजर रहने वाली है। भारत की फिलहाल पहली नीति यही है कि पाकिस्तान को आर्थिक तंगी में धकेला जाए। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति जैसे ही खराब होगी वैसे ही भारत इस युद्ध में आगे निकल सकता है।
नीरज दुबे ने कहा कि यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि कई लोग यहां रहते हैं, खाते यहां की हैं लेकिन गाते पाकिस्तान की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में एक भी जगह भारत का झंडा दिखा दीजिए, ऐसा हो ही नहीं सकता है। लेकिन हमारे देश में ऐसा है। बोलने की आजादी का लोग अब गलत मतलब निकालने लगे हैं। देश प्रेम के मामले में पाकिस्तान हमसे आगे दिखाई देता है। सभी एक सूर में बात करते हैं। लेकिन भारत में ऐसे उदाहरण कम मिलते हैं। पाकिस्तान ने कभी कोई युद्ध नहीं जीता। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने जो कुछ कहा वह उन लोगों को तमाचा है जो पहलगाम हमले को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान लक्ष्मण रेखा खींचने की कोशिश कर रहा है लेकिन उन नेताओं के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है जिन्होंने इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान को खुश करने वाला बयान दिया है।
जातिगत जनगणना मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रॉक है। इसको लेकर नीरज दुबे ने कहा कि न सिर्फ हिंदू बल्कि मुसलमान में भी जातियों की जनगणना होगी। उन्होंने कहा कि जनगणना 2021 में होनी थी। वह नहीं हो पाई है। ऐसे में आने वाले कुछ वर्षों में यह जनगणना कराई जाएगी। उसके बाद डीलिमिटेशन होगा। जनगणना कराई जानी चाहिए। इसी के आधार पर योजनाएं बनती हैं। उन्होंने कहा कि हाल के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने जातिगत जनगणना की मांग को लेकर एक जबर्दस्त अभियान चलाया था जिसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा था। यही कारण है कि भाजपा की सरकार ने जातिगत जनगणना को लेकर बड़ा कदम उठाया है।