Food Poisoning: Kitchen की ये 5 गलतियां बन सकती हैं Food Poisoning का कारण, Health Risk से ऐसे बचें

By अनन्या मिश्रा | Feb 11, 2026

फूड पॉइजनिंग एक ऐसी स्थिति है, जो बासी, बैक्टीरिया युक्त या दूषित खाना खाने से होती है। लेकिन अक्सर फूड पॉइजनिंग को हम सामान्य पेट की खराबी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन आपकी यह लापरवाही शरीर में डिहाइड्रेशन और अंगों की विफलता की वजह बन सकती है। बता दें कि जब ई-कोलाई, साल्मोनेला या लिस्टेरिया जैसे सूक्ष्मजीव खाने के जरिए हमारे पाचन तंत्र में प्रवेश करते हैं, तो वह जहरीले तत्व छोड़ते हैं। जिससे दस्त, तेज बुखार और उल्टी जैसे लक्षण उभरते हैं।

भोजन पकाने और स्टोर करने में होने वाली गलतियां

फूड पॉइजनिंग की सबसे बड़ी वजह 'क्रॉस-कंटैमिनेशन' है। अक्सर लोग उसी चॉपिंग बोर्ड या चाकू का इस्तेमाल पकी हुई चीजों के लिए करते हैं, जिसका इस्तेमाल सब्जियों या कच्चे मांस के लिए किया था। वहीं खाने के कमरे के तापमान पर लंबे समय तक खुला छोड़ाना भी बैक्टीरिया को पनपने का मौका देता है। वहीं फ्रीजर में रखे खाने को बार-बार गर्म करने और फिर ठंडा करना भी टॉक्सिन्स पैदा करता है।

पर्सनल हाइजीन की कमी

हाथों की सफाई में कोताही बरतना भी फूड पॉइजनिंग एक बड़ी वजह हो सकती है। खाना बनाने से पहले या खाना खाने से पहले हाथों को साबुन से जरूर धोना चाहिए। वरना कीटाणु सीधा आपके पेट तक पहुंच जाएंगे। वहीं रसोई के कपड़ों और स्पंज की नियमित सफाई करनी चाहिए। क्योंकि इनमें भी लाखों बैक्टीरिया छिपे होते हैं, जोकि बर्तन के जरिए खाने को दूषित कर देते हैं।

बाहर का खाना और अधपका खाना

बाहर का खाना या स्ट्रीट फूड खाने के दौरान स्वच्छता के मानकों का ध्यान न रखना सेहत पर भारी पड़ता है। कच्चे अंडे, अधपका मांस या बिना धुली सब्जियां 'पैरासाइट्स' का घर होती हैं। अधपके खाने में बैक्टीरिया जीवित रह जाते हैं और शरीर के अंदर पहुंचकर तेजी से प्रजनन करते हैं। विशेष रूप से सी फूड और डेयरी उत्पादों के मामले में बासी भोजन भी जानलेवा साबित हो सकती है।

सतर्कता है जरूरी

फूड पॉइजनिंग से बचाव पूरी तरह से आपके हाथों में होता है। अक्सर स्वाद के चक्कर में हम सेहत को भूल जाते हैं। इसलिए ताजा भोजन खाएं, कच्चे और पके भोजन को अलग-अलग स्टोर करें और रसोई के औजारों को साफ-सुथरा रखें। अगर संक्रमण के बाद लगातार तेज बुखार और उल्टी आ रही हैं, तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आपके द्वारा बरती गई छोटी सी सावधानी आपको हॉस्पिटल के खर्चे और शारीरिक कष्ट से बचा सकती है।

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