By अनन्या मिश्रा | Sep 02, 2023
हिंदू धार्मिक ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों का जिक्र मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के जरिए इस पूरे संसार को गीता का उपदेश दिया था। बता दें कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश तब दिया था। जब उनके कदम कुरुक्षेत्र के युद्ध में भूमि से डगमगाने लगे थे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन का सार यानी की गीता का उपदेश दिया था। जिसे सुनकर अर्जुन अपने लक्ष्य को पूरा करने की ओर अग्रसर हुए। बताया जाता है कि गीता में जीवन की हर परेशानी का हल मिलता है।
फल की इच्छा छोड़ कर्म पर ध्यान दें
हिंदू धार्मिक ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता में श्रीकृष्ण ने कहा कि व्यक्ति को फल की इच्छा को छोड़कर अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसको अपने कर्म के अनुरूप फल प्राप्त होता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।
स्वयं का करें आकलन
भगवान श्री कृष्ण ने गीता में बताय़ा है कि व्यक्ति को खुद से बेहतर और कोई नहीं जान सकता है। इसलिए खुद का आकलन करना बेहद जरूरी होता है। गीता के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी खामियों और गुणों को जान लेता है। वह एक बेहतर व्यक्तित्व का निर्माण करता है और हर काम में सफलता पाता है।
क्रोध पर काबू रखें
कई बार व्यक्ति क्रोध में खुद पर से नियंत्रण खो बैठता है और गलत कार्य कर जाता है। वहीं कई बार व्यक्ति गुस्से में कभी खुद का भी अहित कर बैठता है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने बताया है कि खुद पर कभी भी क्रोध को हावी नहीं होने देना चाहिए। अगर गुस्सा आता भी है तो उस दौरान खुद को शांत रखने का प्रयास करें।
स्पष्ट नजरिया रखें
गीता के मुताबिक व्यक्ति को संदेह या संशय की स्थिति में कभी नहीं रहना चाहिए। क्योंकि जो लोग संशय की स्थिति में रहते हैं, उनका कभी भला नहीं होता है। जीवन में आपका स्पष्ट नजरिया होना काफी ज्यादा जरूरी होता है।
मन पर नियंत्रण रखें
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि हमारा मन ही हमारे दुखों का असली कारण होता है। क्योंकि जो व्यक्ति अपने मन पर काबू पा लेता है। वह मन में उठने वाली बेकार की चिंताओं और इच्छाओं को भी दूर कर सकता है। ऐसा व्यक्ति अपने लक्ष्य को काफी आसानी से प्राप्त कर लेता है।