Prabhasakshi NewsRoom: पूरी पिक्चर ही पलट गयी, इस बार आंदोलन करने नहीं, PM Modi को धन्यवाद देने दिल्ली पहुँचे किसान संगठन

By नीरज कुमार दुबे | Aug 13, 2025

अक्सर दिल्ली की सड़कों पर किसान संगठनों की मौजूदगी का मतलब होता है— नारे, धरना, आंदोलन और सरकार से टकराव। लेकिन इस बार नज़ारा बिल्कुल अलग था। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए किसान प्रतिनिधि न तो नाराज़ थे, न ही किसी मांगपत्र के साथ आए थे। वे आए थे धन्यवाद देने— एक ऐसे फैसले के लिए जिसने उनके दिल में भरोसा और चेहरे पर संतोष ला दिया है। हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दबाव को नज़रअंदाज़ करते हुए भारत के कृषि और डेयरी बाजार में विदेशी उत्पादों को खुला प्रवेश नहीं देने का जो निर्णय लिया है, उसने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को यह एहसास दिलाया है कि उनके हित अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदों से ऊपर हैं। यह सिर्फ नीति का सवाल नहीं, बल्कि संबंध और संवेदनशीलता का प्रतीक है।

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हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका को एकदम स्पष्ट कर दिया है कि भारत के किसान, पशुपालक और मछुआरे केवल अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र हैं। द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के दौरान जब अमेरिका ने भारत के कृषि और डेयरी बाजार में अपने उत्पादों के लिए प्रवेश की मांग रखी, तब मोदी सरकार ने साफ शब्दों में कह दिया कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा, चाहे इसकी कितनी भी राजनीतिक या आर्थिक कीमत क्यों न चुकानी पड़े।

देखा जाये तो यह फैसला केवल एक व्यापारिक रणनीति नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए भरोसे का संदेश है। अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के बावजूद मोदी सरकार ने कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा की। यह कदम किसानों के साथ-साथ पशुपालकों और मछुआरों को भी यह भरोसा देता है कि सरकार उनकी रोज़ी-रोटी और घरेलू बाजार की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले की देश भर के किसान भरपूर सराहना कर रहे हैं। एक दिन पहले विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर प्रधानमंत्री के फैसले की तारीफ की तो वह दृश्य देखने लायक था क्योंकि हाल के वर्षों में ऐसे दृश्य दिखाई नहीं दिये थे। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि मोदी सरकार का फैसला किसानों के आत्मसम्मान को बढ़ाने वाला है। भारतीय किसान चौधरी चरण सिंह संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने इसे “अन्नदाताओं के लिए राहत” और “ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता को सशक्त करने” वाला बताया। ऐसी ही प्रतिक्रियाएं अन्य प्रतिनिधियों की भी रहीं।

हम आपको बता दें कि देश के किसान इस बात से बेहद खुश हैं कि भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके हितों की रक्षा करने के लिए डटे हुए हैं। देखा जाये तो भारतीय अर्थव्यवस्था में ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में भी किसानों का महत्व सर्वाधिक है। देश के लगभग आधे से अधिक मतदाता सीधे या परोक्ष रूप से कृषि से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसानों के हितों की खुलकर रक्षा करने से भाजपा को दीर्घकाल में बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सकता है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भाजपा के समर्थन आधार को यह फैसला और मजबूत कर सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां किसान आंदोलन या कृषि से जुड़े मुद्दे पहले राजनीतिक चुनौती बन चुके हैं।

इसके अलावा, विपक्ष जहां अक्सर भाजपा को “कॉर्पोरेट समर्थक” पार्टी बताने की कोशिश करता है, वहां यह फैसला एक प्रतिवाद के रूप में उभर रहा है जो यह दिखा रहा है कि मोदी सरकार राष्ट्रीय और ग्रामीण हितों के साथ खड़ी है, भले ही वैश्विक महाशक्ति अमेरिका कितना ही दबाव क्यों ना डाले।

वैसे इसमें कोई दो राय नहीं कि अमेरिकी टैरिफ के कारण निर्यात क्षेत्र को अल्पकालिक झटका लग सकता है, लेकिन कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, भारत के पास नए बाजार तलाशने की क्षमता है। दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व जैसे क्षेत्रों में भारतीय कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस रणनीति से भारतीय किसानों को दीर्घकाल में अधिक विविध और स्थिर निर्यात अवसर मिल सकते हैं, जिससे अमेरिकी दबाव का असर सीमित हो जाएगा। किसान प्रतिनिधियों के साथ वार्ता के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अमेरिकी शुल्क में बढ़ोतरी के कारण मौजूदा ‘कठिन समय’ को लेकर ‘चिंता न करने’ का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विशाल भारतीय बाजार कृषि उपज के निर्यात के लिए नए जगहों की तलाश करेगा।

बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने साफ संदेश दे दिया है कि भारत के अन्नदाता किसी भी वैश्विक वार्ता में सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। यह निर्णय न केवल किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है, बल्कि आने वाले वर्षों में भाजपा के लिए एक मजबूत राजनीतिक पूंजी भी साबित हो सकता है।

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